क्या 10-12 गिलास पानी पीना वास्तव में किडनी स्टोन्स को नेचुरल तरीके से निकालने में मदद करता है? यूरोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई
नई दिल्ली, भारत – किडनी स्टोन्स या गुर्दे के पत्थर एक आम स्वास्थ्य समस्या है, जिसका इलाज और रोकथाम हमेशा से ही चिकित्सकों और मरीजों के बीच चर्चा का विषय रही है। कई लोग मानते हैं कि दिन में 10-12 गिलास पानी पीना किडनी स्टोन्स को नेचुरल तरीके से पास करने में मदद करता है। लेकिन क्या यह दावा सच है? आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. रीना शेट्टी के अनुसार, “पानी पीना निश्चित तौर पर किडनी स्टोन्स के इलाज में मददगार होता है, लेकिन इसकी मात्रा और समय का ध्यान रखना जरूरी है। दिन भर में पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने से पेशाब में पत्थर बनने वाले खनिजों की सांद्रता कम हो जाती है, जिससे पत्थर बनने की संभावना घटती है।”
डॉ. शेट्टी ने आगे बताया, “यदि गुर्दे में पहले से पत्थर मौजूद हैं, तो अधिक पानी पीने से वे छोटे पत्थर मूत्र मार्ग से बाहर निकलने में आसान होते हैं। परंतु 10-12 गिलास पानी हर किसी के लिए उपयुक्त मात्रा नहीं हो सकती। यह व्यक्ति की उम्र, शरीर का वजन, मौसम और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।”
वहीं, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित वर्मा का कहना है कि “केवल पानी पीना ही किडनी स्टोन्स का इलाज नहीं है। इसे संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना भी उतना ही जरूरी है। विशेष रूप से जिन लोगों को पहले से पत्थर की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना अत्यधिक पानी पीना भी नुकसानदेह हो सकता है।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन्स को रोकने के लिए हाइड्रेशन सबसे पहला कदम जरूर है, लेकिन इसके साथ-साथ नमक, प्रोटीन और ऑक्सलेट वाली चीजों की मात्रा कम करना भी आवश्यक है। इसके अलावा, यदि दर्द या मूत्र में रक्त नजर आता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इस प्रकार, पानी पीना किडनी स्टोन्स के इलाज और रोकथाम में एक अहम भूमिका निभाता है, लेकिन इसे ही अक्षरशः हर स्थिति में हार्ड एंड फास्ट नियम मान लेना सही नहीं होगा। उचित परामर्श और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार ही पानी की मात्रा निर्धारित करनी चाहिए।
अंत में, विशेषज्ञों का सुझाव है कि पानी का सेवन नियंत्रित और नियमित रूप से करना चाहिए, न कि केवल किडनी स्टोन्स से बचाव के नाम पर अधिक मात्रा में पानी पीना। सही निदान और समय पर इलाज से ही इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

