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खरमास 2026 का अंत: जानिए किस दिन समाप्त होगा और कब से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

नई दिल्ली, दिल्ली – इस वर्ष खरमास 15 मार्च से शुरू होकर करीब एक महीने तक चला, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसका समापन 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ हो जाएगा। खरमास के दौरान पूजा-पाठ, विवाह और अन्य मांगलिक क्रियाओं पर विशेष नियम एवं प्रतिबंध लागू होते हैं।

खरमास शब्द का तात्पर्य होता है कि भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में धरती पर आए थे। इस अवधि में हिंदू धर्म के कई अनुष्ठान और मांगलिक कार्यों का निषेध रहता है क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस महीने में विवाहित जोड़े और परिवार विशेष सतर्कता बरतते हैं और अपने धार्मिक गतिविधियों में संयम रखते हैं।

पूरे भारत में खरमास के नियम और उसका पालन विभिन्न स्थानों पर थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र एवं पुराणों के अनुसार, इसका समापन तब होता है जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इस बार यह परिवर्तन 14 अप्रैल को होना निर्धारित है, जिसके बाद सभी मांगलिक एवं शुभ अनुष्ठान पुनः आरंभ हो सकते हैं।

विशेषज्ञों और ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि खरमास के दौरान नए कार्यों की शुरुआत या मांगलिक आयोजनों का आयोजन उचित नहीं होता। इसलिए इस अवधि का लाभ आत्मिक शांति के लिए ध्यान, पूजा, कथा एवं धार्मिक अनुष्ठान करने में लिया जाता है। इसके समाप्ति के बाद शादी, गृहप्रवेश जैसे सौख्य एवं मांगलिक कार्यों की योजना बनाना शुभ माना जाता है।

इस वर्ष की तारीखों के अनुसार 15 मार्च 2026 से शुरू हुआ खरमास धार्मिक कैलेंडर के अनुरूप 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इसके अंत होते ही हिन्दू समाज में मांगलिक कार्यों की धूम देखने को मिलेगी, जिससे समाज एवं परिवार दोनों में उत्साह का माहौल बनेगा।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि खरमास का यह शुभ-अशुभ काल धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे समझदारी और श्रद्धा के साथ मनाना चाहिए ताकि आपके सभी मांगलिक कार्य सफल रहें।

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