एनटीए की ‘जीरो त्रुटि’ नीति क्यों विफल हुई? | पूरी व्याख्या

नई दिल्ली, दिल्ली | 27 अप्रैल 2024
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) फिर से विवादों में घिर गया है। इस बार परीक्षा में अधिनियमित पेपर लीक आरोप के चलते परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में NEET पेपर लीक मामले कई बार सामने आ चुके हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों में असंतोष का माहौल बना है।
दूसरी तरफ, एनटीए की ओर से वर्षों से ‘जीरो एरर’ नीति अपनाई जा रही है, जिसमें परीक्षा की निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए थे। लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं क्यों लगातार हो रही हैं, यह एक बड़ा सवाल है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही या फिर कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की आड़ में व्यवस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है।
2024 के विवाद के बाद, शिक्षा मंत्रालय और एनटीए ने कई सुधार प्रस्तावित किए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) में NEET का रूपांतरण। इससे पेपर की सुरक्षा में सुधार होगा और पेपर लीक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नतीजतन, ऑनलाइन परीक्षा से परीक्षारत छात्रों के लिए सुविधा भी बढ़ेगी और निगरानी भी कड़ी होगी।
हालांकि, भारत में लगभग 18 लाख से अधिक विद्यार्थी प्रतिवर्ष NEET देते हैं, ऐसे में पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित करना एक चुनौती भी है। इसकी वजह है भारत के कुछ क्षेत्रों में तकनीकी संसाधनों की कमी और डिजिटल साक्षरता का न्यून स्तर। लेकिन एनटीए ने इन बाधाओं को पार करते हुए आने वाले वर्षों में पूर्णतः CBT अपनाने की योजना बनाई है।
इस पूरे विवाद में छात्रों और अभिभावकों की आवाजें भी तेज हो रही हैं, जो परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग करते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल तकनीकी सुधार ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परीक्षा प्रबंधन प्रणाली में सुधार के साथ-साथ भ्रष्टाचार रोकने के ठोस कदम भी आवश्यक हैं।
अंततः NEET की विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भारत के शिक्षा क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है, जिससे भविष्य के डॉक्टरों का चयन सुव्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से हो सके। NTA की जिम्मेदारी है कि वह अपने सुरक्षा तंत्रों को और मजबूत बनाए और छात्रों का विश्वास बहाल करे।



