
सब तक एक्सप्रेस — लखनऊ ब्यूरो
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश मुहिम के तहत लखनऊ के डालीबाग क्षेत्र में माफिया मुख्तार अंसारी की जब्त कोठी को तोड़कर बनाए गए गरीबों के फ्लैटों को लेकर एक बड़ा निर्णय लिया गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि इन फ्लैटों को 25 साल तक न तो बेचा जा सकेगा, न किराए पर दिया जाएगा और न ही किसी के नाम ट्रांसफर किया जा सकेगा।
एलडीए का यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है, ताकि सरकारी योजना की मूल भावना — “गरीबों को स्थायी आवास उपलब्ध कराना” — कायम रहे और बिचौलियों या संपत्ति कारोबारियों द्वारा इन फ्लैटों के दुरुपयोग पर रोक लग सके।
एलडीए के अधिकारियों ने बताया कि लाभार्थी फ्लैट के मालिक तो होंगे, लेकिन वे इसे किसी भी रूप में बेच या किराए पर नहीं दे पाएंगे। इस प्रतिबंध को रजिस्ट्री की शर्तों में स्पष्ट रूप से शामिल करने के लिए निबंधन विभाग को पत्र भेजा गया है।
हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल आवासीय प्रोजेक्ट के अंतर्गत बने इन 72 फ्लैटों की चाबियां लाभार्थियों को सौंपी थीं। डालीबाग जैसे पॉश इलाके में स्थित ये फ्लैट बाजार मूल्य के अनुसार करोड़ों रुपये के हैं, लेकिन सरकार ने इन्हें गरीब परिवारों को न्याय और समान अवसर के प्रतीक के रूप में प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने चाबी वितरण समारोह में कहा था —
“पहले माफिया गरीबों की जमीनें हड़पते थे, अब उनकी संपत्तियां गरीबों के अधिकार में जा रही हैं। माफिया किसी के नहीं होते — वे गरीबों का शोषण करते हैं और समाज में भय फैलाते हैं। अब उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा जो वे समझते हैं।”
एलडीए के अनुसार, यह कदम न केवल गरीब-हितैषी नीति को सशक्त बनाएगा, बल्कि प्राइम लोकेशन वाली संपत्तियों के गलत उपयोग पर भी अंकुश लगाएगा। फ्लैटों के स्वामित्व का अधिकार तो मिलेगा, लेकिन लाभार्थी परिवार इन्हें व्यावसायिक या किराये के उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
यह निर्णय योगी सरकार के “माफिया मुक्त यूपी” अभियान की एक और मिसाल है — जहां माफियाओं की अवैध संपत्तियां अब गरीबों और समाज के हित में उपयोग में लाई जा रही हैं।



