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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
संविधान दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक भव्य और गरिमामय समारोह आयोजित किया गया, जहां देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने चर्चित पुस्तक “तिरंगा” का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, कांस्टीट्यूशन क्लब के सदस्य और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
तिरंगा के गौरव को समर्पित रचना
विमोचित पुस्तक “तिरंगा” भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, उसके गौरव और संविधान में छिपे उन मूल्यों पर आधारित है, जिन्होंने भारत को एक सशक्त लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से पुस्तक का लोकार्पण करते हुए इसे राष्ट्रप्रेम और संवैधानिक चेतना को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया।

लेखक की भावनाएँ
पुस्तक के लेखक, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्री अनिल कुमार यादव ने विमोचन के दौरान कहा—
“तिरंगा सिर्फ़ कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, बलिदानों और संघर्षों का प्रतीक है। मेरी कोशिश है कि इस पुस्तक से नई पीढ़ी राष्ट्रध्वज के महत्व और संवैधानिक मूल्यों को समझ सके।”
कार्यक्रम में रही बड़ी उपस्थिति
विमोचन समारोह में बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और कांस्टीट्यूशन क्लब के सदस्यों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की थीम “संविधान दिवस और रत्न” रही, जिसने राष्ट्रीय एकता, कर्तव्यबोध और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को पुनः रेखांकित किया।

समापन राष्ट्रगान के साथ
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके साथ उपस्थित सभी लोगों ने संविधान की गरिमा और तिरंगे के सम्मान का संकल्प दोहराया।



