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पार्षद को कीचड़ में घसीटा और डीसी की गाड़ी रोकी, दिल्ली के सुल्तानपुरी में क्यों हुआ बवाल?

सुल्तानपुरी में क्यों भड़का गुस्सा?

दिल्ली के सुल्तानपुरी में लोगों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, जब उन्होंने अपने ही स्थानीय पार्षद को कीचड़ में घसीटा और रोहिणी जोन की डिप्टी कमिश्नर (DC) की गाड़ी को रोकने की कोशिश की। यह सिर्फ एक विरोध नहीं था, बल्कि कई महीनों से चल रही लापरवाही और समस्याओं का परिणाम था, जो आखिरकार आक्रोश बनकर बाहर आया। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव, सीवर ओवरफ्लो, टूटे रास्ते, गंदगी और बीमारियों ने जीवन को मुश्किल बना दिया है, लेकिन इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।


निरीक्षण के दौरान हंगामा, पार्षद को गंदगी में घसीटा

बुधवार दोपहर करीब 12 बजे रोहिणी जोन की DC ऋषिता गुप्ता अधिकारियों की टीम के साथ सुल्तानपुरी गए। जैसे ही वे D-7 ब्लॉक की टूटी हुई सड़क पर पहुंचे, वहां के निवासी गुस्सा दिखाते हुए जमा हो गए। आम आदमी पार्टी के स्थानीय पार्षद दौलत पवार भी मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ ने उन्हें ही जवाबदेह ठहराया। लोगों ने पार्षद को जबरन कीचड़ में उतारा और गंदगी में चलने के लिए मजबूर किया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और अधिकारी बिना लोगों से मिले वापस लौट गए।


एक महीने से सीवर ओवरफ्लो और टूटी सड़क से संकट

D-7 ब्लॉक में करीब 300 मीटर सड़क एक महीने से टूटकर पड़ी है। सड़क निर्माण कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया। निर्माण के दौरान कई सीवर ढक्कन टूट गए, जिससे सीवर का गंदा पानी खुलकर सड़कों पर फैल गया। स्थानीय महिलाएं, स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और आम लोग रोज़ इसी गंदे पानी में चलने को मजबूर हैं। सुबह 6 से 10 बजे के बीच सड़क पूरी तरह से कीचड़ और सीवेज के पानी में डूबी रहती है, जिससे लोगों का निकलना लगभग असंभव हो जाता है।


बदबू, मच्छर और बीमारियों ने बिगाड़ा स्वास्थ्य

गंदे पानी और कचरे की बदबू से यहां रहना मुश्किल हो गया है। कई परिवार पेट, त्वचा और बुखार जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासी नीतू बताती हैं कि पानी इतना गंदा है कि उन्हें दूसरे ब्लॉक से मटके में पानी लाना पड़ता है। वहीं सीमा कौर का कहना है कि कचरा उठाने वाली गाड़ी कभी नहीं आती, जिससे सड़क पर फेंका हुआ कचरा दिनों तक पड़ा रहता है और मच्छरों का अड्डा बन जाता है।


बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे ज़्यादा खतरा

यहां के लोग बताते हैं कि छठ पूजा के दौरान कई बच्चे गंदे पानी में फिसलकर घायल हो गए थे। मीना कौर बताती हैं कि पिछले महीने भी एक बच्चा टूटे सीवर ढक्कन में गिरकर घायल हो गया। गलियां इतनी गंदी हैं कि बच्चे बाहर खेल भी नहीं सकते। वहीं, गुरुद्वारे के ग्रंथी हरदयाल सिंह का कहना है कि सुबह-सुबह लोग गुरुद्वारा तक नहीं पहुंच पा रहे, क्योंकि सड़क पूरी तरह सीवेज पानी में डूबी रहती है।


प्रशासन की सफाई और स्थानीय प्रतिनिधियों की शिकायत

लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभाने आते हैं, लेकिन वास्तव में कोई साफ-सफाई नहीं होती। प्रशासन की ओर से GRAP (प्रदूषण रोकथाम योजना) का हवाला देकर काम टाला जा रहा है, जबकि इलाके की हालत बद से बदतर होती जा रही है। पार्षद दौलत पवार का कहना है कि लोगों का गुस्सा जायज़ है और प्रशासन को जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।


लोगों को मिली सिर्फ आश्वासन, समाधान अभी भी दूर

DC ने मौके पर पहुंचकर लोगों की शिकायत सुनी और जल्द समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन निवासी अब सिर्फ भरोसे से नहीं, काम होते देखना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक सड़क, सीवर और सफाई की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक विरोध जारी रहेगा। सुल्तानपुरी की यह घटना सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जनसुविधाओं की अनदेखी का बड़ा संकेत है।


निष्कर्ष
सुल्तानपुरी में पार्षद को कीचड़ में घसीटना कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था से टूटे धैर्य का परिणाम है। लोग चाहते हैं कि उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान हो—सड़क, सफाई, पानी और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं मिलें। यह एक चेतावनी है कि जब जनसुनवाई और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती, तो हालात यही रूप ले लेते हैं।

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