जयपुर

राजस्थान में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के स्कूल में मोबाइल के उपयोग पर रोक, हाई कोर्ट ने गाइडलाइन बनाने का दिया निर्देश

राजस्थान हाई कोर्ट ने स्कूलों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस बारे में गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया है, ताकि बच्चों पर मोबाइल के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके। यह फैसला बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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HighLights

  1. राजस्थान में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर मोबाइल प्रतिबंध
  2. हाई कोर्ट का दिशानिर्देश बनाने का निर्देश
  3. बच्चों के स्वास्थ्य पर मोबाइल के प्रभाव

 राजस्थान उच्च न्यायालय ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूल में मोबाइल, आनलाइन खेल और इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने इसके लिए राज्य सरकार के गृह एवं शिक्षा विभाग को अभिभावक संगठनों के साथ मिलकर गाइडलाइन तय करने के भी निर्देश दिए हैं।

साथ ही न्यायालय ने किसी भी व्यक्ति के नाम से तीन से अधिक मोबाइल सिम कार्ड जारी करने पर रोक को लेकर भी एसओपी तय करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश रवि चिरानिया की एकलपीठ ने ठगी के दो आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के गृह, शिक्षा एवं पुलिस विभाग को यह निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे भारतीय साइबर क्राइम को-आर्डिनेशन सेंटर की तर्ज पर राजस्थान साइबर अपराध नियंत्रण केंद्र की स्थापना करें।

न्यायालय ने साइबर लैब की स्थापना, पुराने मोबाइल बेचने का रिकार्ड रखने की प्रक्रिया तय करने, अलग-अलग टोलफ्री नंबर और आटोमैटिक एफआइआर दर्ज होने, एआइ टूल्स के उपयोग, साइबर लैब की स्थापना के भी निर्देश दिए हैं।

न्यायालय ने जोधपुर के साइबर थाने में दर्ज एक साइबर अपराध के दो आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसले में लिखा, पुलिस साइबर अपराधों की जांच करने की तकनीकी ज्ञान के अभाव में पिछड़ रही है।

डिजिटल अपराध की रकम कुछ ही मिनटों में कई खातों के जरिए क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेज दी जाती है। सामान्य पुलिस अधिकारी इस बारे में जांच नहीं कर सकते। न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक साइबर अपराध के अधीन विशेष आइटी निरीक्षकों की भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। यह केवल साइबर अपराधों की ही जांच कर सके।

न्यायालय ने प्रदेश में बिकने वाले सभी डिजिटल उपकरणों को पुलिस महानिदेशक साइबर अपराध की निगरानी में लाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक आनलाइन प्रक्रिया विकसित की जानी चाहिए। न्यायालय ने गिग श्रमिकों के पुलिस वेरिफिकेशन के भी निर्देश दिए हैं।

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