
मौत का फार्महाउस — कोरबा के तिहरे हत्याकांड का रहस्य
(यह संस्करण अलग कथात्मक शैली में—जैसे कोई रिपोर्टर मौके पर मौजूद हो)
1. फार्महाउस का सन्नाटा—और भीतर छिपा खौफनाक सच
जब पुलिस रात लगभग 12 बजे फार्महाउस पहुंची, हवा में एक अजीब सा सन्नाटा तैर रहा था।
फार्महाउस के मुख्य दरवाज़े आधे खुले थे।
अंदर अंधेरा था, बस टॉर्च की रोशनी में असली भय सामने आया—एक ही कमरे में तीन शव।
2. मृतकों में कौन-कौन थे?
पहला शव—अशरफ मेमन का, जो चेयर के पास पड़ा था।
दूसरा—एक स्थानीय युवक,
तीसरा—बिलासपुर का युवक।
तीनों के चेहरे पर दर्द और संघर्ष के आसार साफ थे।
3. घटना स्थल—हर निशान कुछ कह रहा था
टूटी टेबल, गिरे हुए कांच, फर्श पर फैले कपड़े, मेज पर पड़ी अधूरी नोटबुक।
यह कमरा साफ बता रहा था कि यहां कोई शांत माहौल नहीं था।
घटना से पहले कोई गरमागरम बातचीत, बहस या झगड़ा हुआ है।
4. हत्या कैसे हुई?
गला दबाकर हत्या, वह भी तीन लोगों की—
यह तभी संभव है जब हमलावर कई हों।
पुलिस इसलिए मान रही है कि यह घटना किसी गिरोह या समूह ने अंजाम दी है।
मृतकों के हाथों पर खरोंच और शरीर पर घाव ये साफ दिखाते हैं कि उन्होंने जान बचाने की कोशिश की।
5. पुलिस की तेज कार्रवाई—तीन संदिग्ध पकड़े गए
एक घंटे में पूरे जिले की पुलिस सक्रिय कर दी गई।
मुखबिरों को लगाया गया।
रात 3 बजे के करीब पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया।
इनके बयान पर पुलिस सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है।
6. डिजिटल फुटेज और मोबाइल डेटा—राज खुलेगा
फार्महाउस के बाहर लगे कैमरों में दो संदिग्ध बाइकें दिखीं।
उनमें से एक पर दो लोग बैठे थे और दूसरी बाइक हत्या से ठीक पहले फार्महाउस के अंदर जाती दिखाई दे रही है।
पुलिस इसी सुराग पर आगे बढ़ रही है।
7. मृतकों की पृष्ठभूमि—क्यों जुड़े थे तीनों?
सबसे बड़ा सवाल यही है।
अशरफ मेमन अपने कारोबार के कारण कई जिलों में पहचाने जाते थे।
स्थानीय युवक उनके साथ अक्सर रहता था।
बिलासपुर वाले युवक की मौजूदगी एक रहस्य है—
क्या वह किसी सौदे के लिए आया था?
या किसने उसे बुलाया था?
8. परिवार की प्रतिक्रिया—दर्द और आक्रोश
परिवार का एक ही सवाल—
“अगर अशरफ का कोई विवाद था, तो पुलिस को पहले क्यों जानकारी नहीं मिली?”
घरवालों का मानना है कि यह हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध है।
9. पुलिस के सामने तीन मुख्य एंगल
A. व्यापारिक दुश्मनी
स्क्रैप बाजार में छोटे से विवाद में भी बड़े नुकसान और हिंसा की घटनाएं होती रहती हैं।
B. पैसों का लेनदेन
हजारों-लाखों नहीं, बल्कि कई बार करोड़ों तक पहुंचने वाले लेनदेन में विश्वासघात आम है।
C. निजी झगड़ा
किसी नजदीकी व्यक्ति द्वारा किया गया हमला भी एंगल में शामिल है।
10. जांच में तेजी
फॉरेंसिक टीम ने 35 से अधिक सैंपल उठाए हैं।
क्राइम सीन को विशेष प्रोसेस में संरक्षित किया गया है।
सभी वाहनों की आवाजाही का रूट मैपिंग हो रहा है।
11. कोरबा की जनता का डर
घटना के बाद कई कॉल सोशल मीडिया पर फैलने लगे।
लोग कह रहे हैं—
“कोरबा अब सुरक्षित नहीं रहा।”
व्यापारी संघों ने अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा की मांग कर दी है।
निष्कर्ष
यह तिहरा हत्या मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि गहरी साजिश का संकेत देता है।
पुलिस के पास कई मजबूत सुराग हैं और जल्द ही मामला सुलझने की उम्मीद है।



