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लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा अपने ही आदेशों का पालन न किए जाने से नाराज़ बिजली संविदा कर्मियों ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किया। लखनऊ सहित विभिन्न जनपदों में आक्रोशित कर्मचारियों ने समझौता पत्र की प्रति जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
बिजली संविदा कर्मियों का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने अपने आदेश दिनांक 15-05-2017 का उल्लंघन करते हुए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों के परिचालन एवं अनुरक्षण कार्य में तैनात लगभग 15 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मानक समिति की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जा रही है और आदेश दिनांक 18-09-2025 के अनुरूप कार्य के अनुसार अनुबंध एवं ₹18,000 वेतन निर्धारण भी नहीं किया गया है।
कर्मचारियों ने मार्च 2023 में हटाए गए कर्मियों को पुनः कार्य पर न लेने, घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज न कराने, उपचार में खर्च धनराशि का भुगतान न करने, 55 वर्ष की आयु का हवाला देकर अनुभवी कर्मचारियों को हटाने, वर्टिकल व्यवस्था लागू करने, भ्रष्ट ठेकेदारों पर कार्रवाई न करने, मीटर रीडरों को न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने तथा स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में मीटर रीडरों को हटाने जैसे मुद्दों पर भी गंभीर आरोप लगाए।
संगठन के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान निदेशक (कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन) की अध्यक्षता में शक्ति भवन लखनऊ में प्रबंधन और संगठन पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई थी, जिसमें कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी। इसमें किसी भी कर्मचारी को कार्य से न हटाने, 55 वर्ष के आधार पर हटाए गए कर्मचारियों को रिक्त पदों पर समायोजित करने, मार्च 2023 में हटाए गए कर्मचारियों की पुनः बहाली, घायल कर्मचारियों के उपचार खर्च का भुगतान तथा मीटर रीडरों के वेतन की जांच शामिल थी।
हालांकि संगठन का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा 29 नवम्बर 2025 को जारी किया गया कार्यवृत्त, 26 नवम्बर 2025 की बैठक में बनी सहमति के अनुरूप नहीं है। इसी के विरोध में 23 दिसम्बर 2025 को प्रदेश के विभिन्न जनपदों में प्रदर्शन कर कार्यवृत्त की प्रतियां जलाई गईं।
लखनऊ जनपद में शाम चार बजे कर्मचारियों ने रैली निकालकर मुख्य अभियंता, अमौसी जोन, इन्द्रलोक हाइडिल कॉलोनी, कृष्णा नगर स्थित लेसा कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और समझौता पत्र की प्रति का दहन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



