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20 जनवरी को विधानसभा घेराव के लिए कर्मचारियों ने भरी हुंकार

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के मंडल सम्मेलन हुए सम्पन्न

सब तक एक्सप्रेस।

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के आंदोलन के तृतीय चरण के तहत 26 दिसंबर को वाराणसी मंडल सम्मेलन एवं प्रेस वार्ता के आयोजन के साथ तीसरा चरण पूर्ण हो गया। प्रदेश भर में आयोजित मंडलीय सम्मेलनों में संयुक्त परिषद से संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे.एन. तिवारी ने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। आंदोलन का तीसरा चरण पूरा होने के बावजूद न तो मुख्य सचिव और न ही प्रमुख सचिव कार्मिक एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों से वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में परिषद ने मुख्य सचिव को कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए 3 सितंबर तक समाधान की मांग की थी, लेकिन शासन स्तर पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारी निगम का गठन तो किया, लेकिन अब तक आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय का लाभ नहीं मिला। प्रदेश के विभिन्न विभागों में लाखों पद रिक्त हैं, फिर भी नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। संविदा एवं ठेकेदारी प्रथा के तहत कार्यरत कर्मचारियों का शोषण चरम पर है और मनमाने ढंग से सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।
संयुक्त परिषद ने नगरीय परिवहन सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों की छंटनी, समाज कल्याण एवं जनजाति विकास विभाग में संविदा शिक्षकों को हटाए जाने, वेतन विसंगतियों, आशा बहुओं के शोषण, संविदा कर्मियों के मानदेय में वर्षों से वृद्धि न होने और कर्मचारियों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
संयुक्त परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष निरंजन कुमार श्रीवास्तव ने पुरानी पेंशन बहाली, खाद्य रसद विभाग में नियम विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त करने, धान खरीद में आयरिश स्कैनिंग की अनिवार्यता समाप्त करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम मानदेय, आशा बहुओं को ₹18,000 मानदेय तथा रसोइया, चौकीदार को समान सुविधा देने की मांग दोहराई। उन्होंने 20 जनवरी 2026 को विधानसभा घेराव की तैयारी पूर्ण होने का ऐलान किया।
महामंत्री अरुणा शुक्ला ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का नारा देने वाली सरकार में महिला कर्मचारियों का सबसे अधिक शोषण हो रहा है। महिला पदाधिकारियों को परेशान किया जा रहा है और शासनादेशों के बावजूद विशेष अवकाश व सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उन्होंने संविदा कर्मियों के लिए वार्षिक वेतन वृद्धि, चिकित्सा सुविधा एवं बोनस की मांग भी रखी।
सम्मेलनों में चिकित्सा स्वास्थ्य, खाद्य रसद, नगरीय परिवहन, कृषि, शिक्षा, उच्च शिक्षा, लोक निर्माण, परिवहन निगम, समाज कल्याण, वन एवं पर्यावरण सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी एवं पदाधिकारी शामिल हुए। कर्मचारियों के उत्साह और एकजुटता को देखते हुए संयुक्त परिषद ने दावा किया कि 20 जनवरी को विधानसभा घेराव कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा।

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