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लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की हालिया भर्तियों को लेकर ओबीसी और एससी आरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. लौटनराम निषाद ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार में ओबीसी और एससी के संवैधानिक हक पर खुली डकैती की जा रही है, जबकि भाजपा के ओबीसी और एससी नेता इस हकमारी पर चुप्पी साधे हुए हैं।
लौटनराम निषाद ने कहा कि एक लाख से डेढ़ लाख रुपये वेतन वाली राजपत्रित पदों की भर्तियों में आरक्षण नियमावली का खुलेआम उल्लंघन हुआ है। कई वर्षों बाद आई इन भर्तियों में एक-एक पद की कटौती भी सामाजिक न्याय पर बड़ा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली का गला घोंटा जा रहा है और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस पर मौन हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मंडल आयोग विरोधी मानसिकता के तहत ओबीसी और एससी वर्ग को उनके अधिकार से वंचित कर रही है। निषाद ने भाजपा के कई ओबीसी और एससी नेताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वे निजस्वार्थ में अपने ही समाज के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं।
भर्तियों में आरक्षण कटौती के उदाहरण
लौटनराम निषाद ने आरोपों के समर्थन में कई उदाहरण गिनाए। उन्होंने बताया कि
● वेटनरी ऑफिसर के 404 पदों में ओबीसी को मिलने वाले 109 पद शून्य कर दिए गए।
● स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के 221 पदों में ओबीसी के 60 के सापेक्ष केवल 20 पद आरक्षित किए गए।
● चिकित्सा अधिकारी (होम्योपैथिक) के 7 पदों में ओबीसी के दोनों पद खत्म कर दिए गए।
● चिकित्सा अधिकारी (यूनानी) के 25 पदों में ओबीसी के 6 के बजाय केवल 3 पद दिए गए।
● चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद) के 168 पदों में ओबीसी को 45 के स्थान पर मात्र 15 पद आरक्षित किए गए।
● दंत चिकित्सक के 157 पदों में ओबीसी के 42 के सापेक्ष 39 पद दिए गए।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम प्रवर्तन कांस्टेबल के 477 पदों में सामान्य वर्ग को अतिरिक्त लाभ देते हुए ओबीसी और एससी के पद घटाए गए।
उन्होंने दावा किया कि लगभग 2100 पदों के विज्ञापनों में करीब 200 पद ओबीसी वर्ग से छीने गए हैं।
तत्काल कार्रवाई की मांग
लौटनराम निषाद ने मांग की कि ऐसे सभी विज्ञापनों को तत्काल रद्द कर संशोधित रूप में दोबारा जारी किया जाए। साथ ही आरक्षण नियमावली का उल्लंघन करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और बिना पेपर लीक के निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नौकरियां न देने की साजिश के तहत इस तरह की नीतियां अपना रही है।
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