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सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने मासिक संगोष्ठी में बांटे कंबल

सेवा में समर्पित मातृशक्तियों को सिंदूरी ‘जय श्रीराम’ शॉल देकर किया सम्मान

सब तक एक्सप्रेस।

लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल के नेतृत्व में “सेवा परमो धर्म” के संदेश के साथ मासिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए कार्यक्रम के दौरान जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए। इसके साथ ही धर्म और सेवा के कार्यों में निस्वार्थ रूप से समर्पित मातृशक्तियों को “जय श्रीराम” अंकित विशेष सिंदूरी शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सपना गोयल ने बताया कि प्रतिवर्ष 21 दिसंबर को उनके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में “सेवा पखवाड़ा” मनाया जाता है। इसके अंतर्गत लखनऊ सहित आसपास के क्षेत्रों में जरूरतमंदों तक कंबल पहुंचाए जा रहे हैं। पारा, जानकीपुरम सहित अन्य क्षेत्रों में सुंदरकांड का सामूहिक पाठ भी किया गया। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2026 को अंसल बरौना और पारा क्षेत्र, संक्रांति पर किसान पथ के गांवों में तथा 4 जनवरी को गोंडा में भी कंबल वितरण किया जाएगा।
सपना गोयल ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में कानपुर में पांच हजार महिलाओं द्वारा वृहद सुंदरकांड अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अंग्रेजी नववर्ष के अवसर पर संदेश देते हुए कहा कि भारतीय नववर्ष 19 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होगा, इसी दिन विक्रम संवत 2083 और चैत्र नवरात्रि भी शुरू होंगे। उन्होंने लोगों से भारतीय परंपराओं के अनुसार नववर्ष मनाने, पूजा-पाठ करने और सात्विक जीवन अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति द्वारा प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ तथा प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शनिवार को सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन किया जा रहा है। बिना किसी सरकारी या निजी सहयोग के महिला दिवस 10 मार्च 2024 को झूलेलाल घाट, लखनऊ में पांच हजार से अधिक मातृशक्तियों द्वारा सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन किया गया था।
समिति की ओर से उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित सिद्धबली मंदिर, नैमिषारण्य, काशी विश्वनाथ, हर की पौड़ी, रुड़की महादेव मंदिर, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर और अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में भी सुंदरकांड पाठ आयोजित किया जा चुका है। सपना गोयल ने कहा कि उनका उद्देश्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना है और इसके लिए सेवा, संस्कार और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का कार्य निरंतर जारी रहेगा।

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