
सब तक एक्सप्रेस।
👉 टॉप लीडरशिप डैमेज कंट्रोल में जुटी
👉 पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को सौंपी गई नाराज विधायकों को मनाने की जिम्मेदारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक को लेकर भारतीय जनता पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। विधायकों की नाराजगी सामने आने के बाद पार्टी की शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। इस क्रम में मंगलवार को दो अहम राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले, जिन्हें ब्राह्मण विधायकों की बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है।
देवरिया से भाजपा विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी उन विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने 23 दिसंबर को लखनऊ में हुई ब्राह्मण विधायकों की बैठक में हिस्सा लिया था। सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा थी कि अगली बैठक उनके आवास पर हो सकती है।
इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इन दोनों मुलाकातों को ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी और संगठनात्मक असंतोष से जोड़कर अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से ले रहा है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पहले ही यह संकेत दिया जा चुका है कि इस तरह की अलग-अलग बैठकों की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए, अन्यथा कड़ा कदम उठाया जा सकता है।
इसी बीच भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद रमापति राम त्रिपाठी ने बैठक में शामिल ब्राह्मण विधायकों से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने विधायकों को संयम बरतने की सलाह देते हुए भरोसा दिलाया कि पार्टी के भीतर सभी मुद्दों पर संवाद के लिए मंच उपलब्ध है।
रमापति राम त्रिपाठी को वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का करीबी माना जाता है। पूर्वांचल की राजनीति में यह आम चर्चा है कि पंकज चौधरी कई मामलों में रमापति राम से मार्गदर्शन लेते हैं। स्वयं रमापति राम त्रिपाठी भाजपा के बड़े ब्राह्मण चेहरे रहे हैं और संगठन में उनका लंबा अनुभव है।
सूत्रों के मुताबिक त्रिपाठी ने विधायकों से कहा कि नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बिना उनसे संवाद किए इस तरह की बैठक करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सभी विधायकों की बात सुनेंगे और समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास करेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ब्राह्मण विधायकों की नाराजगी को समय रहते संभालना भाजपा के लिए जरूरी है, क्योंकि यह मामला आने वाले समय में संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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