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​संघ ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ का सात्विक व अभय पुजारी: पारसनाथ मिश्र

रिपोर्ट: वरिष्ठ संवाददाता, राम अनुज धर द्विवेदी

सब तक एक्सप्रेस

सोनभद्र। जनपद के विभिन्न विकास खंडों में शुक्रवार को ‘सकल हिंदू समाज’ के तत्वावधान में भव्य हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इस दौरान विकास खंड छपका के मानपुर व बहुअरा तथा चतरा ब्लॉक के सिल्थम में आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक एकता पर बल दिया।

​राष्ट्रहित ही संघ का पावन प्राण

​सिल्थम स्थित आदिवासी इंटरमीडिएट कॉलेज में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रख्यात राष्ट्रीय चिंतक एवं लेखक पारसनाथ मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) निर्भ्रांत रूप से “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का सात्विक एवं अभय पुजारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ भारत माता को केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि भू-सांस्कृतिक देवी मानकर वंदन करता है।

​मिश्र ने अपने संबोधन में कहा:

​”संघ के रोम-रोम में लोकमंगल और राष्ट्रीय सर्वोपरिता का प्रवाह है। राष्ट्रहित इसका प्राण है और राष्ट्र सेवा इसके निर्विकार हृदय की धड़कन। संघ ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ के मंत्र को जीता है और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संकल्प के साथ मानवता की सेवा में संलग्न है।”

 

​वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक समरसता

​संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ रक्त, जाति, वंश या भाषा के आधार पर श्रेष्ठता तय नहीं करता, बल्कि पावन समता की भूमि पर ईश्वरीय सत्ता का आराधक है। त्यागपूर्ण जीवन और भारतीय मूल्यों का संरक्षण ही इसकी पहचान है। पिछले 100 वर्षों की साधना से संघ ने हिंदुत्व को जो प्रकर्ष प्रदान किया है, वह शब्दातीत है।

​प्रमुख उपस्थिति

​कार्यक्रमों की अध्यक्षता सतीश जी ने की। इस अवसर पर जिला संयोजक आलोक कुमार चतुर्वेदी, खंड संयोजक नंदलाल विश्वकर्मा, रमेश चौबे, निर्भय शंकर पांडे, लालू प्रसाद यादव, भूपेंद्र सिंह, प्रचारक राहुल जी, मुन्ना धागर, शताब्दी वर्ष अभियान के जिला संयोजक अरुणेश पाण्डेय सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

विशेष  समाचार:

​19वीं पुस्तक “प्रिय लागहूँ मोहि राम” शीघ्र होगी प्रकाशित

​सोनभद्र के गौरव और प्रख्यात साहित्यकार पारसनाथ मिश्र (पूर्व प्रवक्ता) अब तक 18 पुस्तकें लिख चुके हैं। उनके द्वारा रचित महाकाव्य “रामानुज भरत” की सराहना देश के पूज्य शंकराचार्यों और शिक्षाविदों ने की है। जानकारी के अनुसार, उनकी 19वीं कृति “प्रिय लागहूँ मोहि राम” जल्द ही पाठकों के बीच होगी।

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