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“राजद्रोह को जो कह राष्ट्रद्रोह दमन करे, भ्रष्ट नेता नगरी की लंका को जलाइए…”

मधुरिमा के 64वें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में झूमे श्रोता

ब्यूरो रिपोर्ट | सब तक एक्सप्रेस
सोनभद्र।
रॉबर्ट्सगंज स्थित आरटीएस क्लब मैदान में विगत छह दशकों से अनवरत आयोजित हो रही मधुरिमा साहित्य गोष्ठी का 64वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षणों के साथ संपन्न हुआ। यह सारस्वत महायज्ञ साहित्य के क्षेत्र में एक ऐसी परंपरा बन चुका है, जिसने समय के साथ अपनी गरिमा और प्रासंगिकता को निरंतर बढ़ाया है।
लगभग 90 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार पं. अजय शेखर ने 26 वर्ष की उम्र में इस आयोजन का संकल्प लिया था। रजत, स्वर्ण और हीरक जयंती के पड़ाव पार करते हुए यह सम्मेलन अब नीलम जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है और साहित्य साधना से सिद्धि की ओर अग्रसर है।

कोहरे और ठंड के बीच कविता की गर्माहट

शुक्रवार की सर्द शाम, घने कोहरे और बादलों की चादर के बीच आरटीएस क्लब मैदान कविता, गीत, ग़ज़ल, छंद और शेरो-शायरी की गूंज से जीवंत हो उठा। ‘वाह-वाह’ और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ श्रोता देर रात तक साहित्य के रस में डूबे रहे।
कार्यक्रम का आयोजन मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के उपनिदेशक आशुतोष पाण्डेय ‘मुन्ना’ के संयोजन में हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार मनमोहन मिश्र ने की, जबकि नगर पालिका परिषद रॉबर्ट्सगंज की अध्यक्ष रूबी प्रसाद मुख्य अतिथि रहीं। मंच संचालन वाराणसी से आए हास्य कवि नागेश सांडिल्य ने किया।

कविता में राजनीति, समाज और राष्ट्रवाद

कार्यक्रम का शुभारंभ लोकभाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार जगदीश पंथी के विषय प्रवर्तन एवं स्वागत भाषण से हुआ। ईश्वर विरागी की वाणी वंदना ने माहौल को आध्यात्मिक रंग दिया।
हास्य कवि अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ ने अपनी रचना से श्रोताओं को ठहाकों से लोटपोट कर दिया।
वाराणसी से आए डॉ. धर्म प्रकाश मिश्र ने राजनीति पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा—
“गिद्ध अब पेड़ों पर नहीं, कुर्सियों पर मिलते हैं…”
चंदौली के गीतकार मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ की भावनात्मक रचना ने श्रोताओं को गहरे तक छुआ।
ओज, राष्ट्रभक्ति और व्यवस्था पर प्रहार
ओज कवि प्रभात सिंह चंदेल की राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत पंक्तियों—
“राजद्रोह को जो कह राष्ट्रद्रोह दमन करे,
भ्रष्ट नेता नगरी की लंका को जलाइए…”
पर पूरा पंडाल भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।


कवयित्री डॉ. रचना तिवारी ने धर्म, राजनीति और शहादत पर सशक्त रचना प्रस्तुत कर आयोजन को नई ऊंचाई दी।
शायर अब्दुल हई, सुधाकर स्वदेश प्रेम, यथार्थ विष्णु, लखन राम जंगली, कमल नयन त्रिपाठी और विवेक चतुर्वेदी की प्रस्तुतियों ने समाज के विविध पक्षों को कविता के माध्यम से उजागर किया।

शिखर पर अध्यक्षीय काव्यपाठ

लखनऊ से आए प्रख्यात गीतकार डॉ. सुरेश और वाराणसी के सलीम शिवालवी की रचनाओं ने लोकतंत्र और संघर्ष को स्वर दिया।
अंत में अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए मनमोहन मिश्र ने अपनी रचना से सम्मेलन को शिखर पर पहुंचा दिया।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण मुरारी गुप्ता, सीओ सिटी रणधीर मिश्रा, समाजसेवी अनु विलियम (बेल्जियम), वनवासी सेवा आश्रम के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिवक्ता, पत्रकार, साहित्यकार, व्यापारी नेता एवं विभिन्न राजनीतिक दलों के गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
64वां मधुरिमा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कविता, विचार और संवेदना की अमिट छाप छोड़ते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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