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बालकों को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाता है शोषण के विरुद्ध अधिकार : अमित मिश्रा

महंगांव इंटर कॉलेज में बाल अधिकार, पॉश एक्ट पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित

सब तक एक्सप्रेस।
कौशाम्बी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जनपद न्यायालय कौशाम्बी के तत्वावधान में मंगलवार को महंगांव इंटर कॉलेज, महंगांव चायल में शोषण के विरुद्ध अधिकार, पॉश एक्ट एवं बाल अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों को बालकों व महिलाओं के अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. नरेन्द्र दिवाकर ने कहा कि आज बच्चे हिंसा, संघर्ष और बदलते सामाजिक परिवेश के दुष्प्रभावों से प्रभावित हो रहे हैं। बालक समाज का भविष्य हैं और उन्हें बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने बताया कि बाल अधिकारों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों—जीवन का अधिकार, संरक्षण का अधिकार, विकास का अधिकार और सहभागिता का अधिकार—में बांटा गया है। ये अधिकार बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें शोषण और उपेक्षा से भी सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की भी जानकारी दी।
अधिवक्ता संदीप द्विवेदी ने कहा कि शोषण के विरुद्ध अधिकार से जुड़े प्रावधान भारतीय संविधान सहित विभिन्न कानूनों में स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 बालकों को शोषण से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा बाल मजदूरी अधिनियम 1986, पॉक्सो एक्ट 2012 और कारखाना अधिनियम 1948 जैसे कानून बाल अधिकारों के संरक्षण की गारंटी देते हैं।
तहसील विधिक सहायता क्लीनिक के अध्यक्ष एवं तहसीलदार चायल ने कहा कि बच्चे अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए उनके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार आवश्यक है। बच्चों के साथ मारपीट, डराना-धमकाना, मजदूरी करवाना या खतरनाक कार्यों में लगाना अपराध है। उन्होंने बताया कि बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति का जागरूक होना जरूरी है और किसी भी समस्या के समाधान हेतु तहसील विधिक सहायता क्लीनिक से संपर्क किया जा सकता है।
चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल अमित कुमार मिश्रा ने कहा कि भारतीय संविधान एवं विभिन्न कानूनों में वर्णित शोषण के विरुद्ध अधिकार विशेष रूप से बच्चों और कमजोर वर्गों को गुलामी और अमानवीय परिस्थितियों से बचाते हैं। उन्होंने पॉश एक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है और उत्पीड़न की स्थिति में पीड़िता को विशेष अधिकार देता है।
कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत शपथ भी दिलाई गई। अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य मो. नसीम खां ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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