महासमुंद में धान घोटाला: 18,433 क्विंटल अनाज चूहे और कीट खाने का दावा।

महासमुंद में 18,433 क्विंटल धान ‘खा गए’ चूहे-कीट, पांच करोड़ रुपये का नुकसान
छत्तीसगढ़ में धान भंडारण व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। महासमुंद जिले के बागबाहरा स्थित संग्रहण केंद्र में 18,433 क्विंटल धान की भारी कमी सामने आई है। इस नष्ट हुए धान की अनुमानित कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये बताई जा रही है। वर्ष 2024–2025 के लिए भंडारित धान के स्टॉक का मिलान किए जाने पर यह गंभीर मामला उजागर हुआ। जब जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में जवाब-तलब किया गया तो उन्होंने चूहों, दीमक, अन्य कीटों और धान के सूखने को इसकी मुख्य वजह बताया।
स्टॉक मिलान के दौरान हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार, बागबाहरा संग्रहण केंद्र में लंबे समय से रखे गए धान का जब रिकॉर्ड के अनुसार भौतिक सत्यापन किया गया, तब वास्तविक मात्रा में भारी अंतर पाया गया। कागजों में दर्ज मात्रा के मुकाबले 18,433 क्विंटल धान कम मिला। इस पर प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में संग्रहण केंद्र प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसमें उन्होंने प्राकृतिक कारणों से धान के नष्ट होने की बात कही।
अधिकारियों ने चूहे, कीट और नमी को ठहराया जिम्मेदार
संग्रहण केंद्र के प्रभारी दीपेश पांडे का कहना है कि धान करीब 10 महीनों तक गोदाम में रखा गया था। इस दौरान धान के सूखने से उसका वजन काफी कम हो गया। इसके अलावा बारिश के कारण गोदाम में नमी बढ़ी, जिससे दीमक और चूहों का प्रकोप हुआ। उनका दावा है कि इन्हीं कारणों से धान को भारी नुकसान पहुंचा और स्टॉक में इतनी बड़ी कमी सामने आई।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
महासमुंद का यह मामला प्रदेश में तीसरा बड़ा धान शॉर्टेज प्रकरण है। इससे पहले कबीरधाम जिले के दो अलग-अलग संग्रहण केंद्रों में करीब 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग आठ करोड़ रुपये बताई गई थी। उस समय भी अधिकारियों ने चूहों और कीटों को ही नुकसान का कारण बताया था। लगातार एक जैसे तर्कों के साथ करोड़ों रुपये के धान की कमी सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच के आदेश, नोटिस जारी
महासमुंद जिला विपणन अधिकारी आशुतोष कोसरिया ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी। यदि लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
धान सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
गौरतलब है कि शासन द्वारा धान की सुरक्षा और भंडारण के लिए विस्तृत व्यवस्था की जाती है। संग्रहण केंद्रों में मार्कफेड के कर्मचारियों की तैनाती होती है। इसके अलावा परिवहन भाड़ा, हमाली, भंडारण शुल्क और सुरक्षा व्यवस्था पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। इन सभी इंतजामों के बावजूद यदि चूहे और कीट इतने बड़े पैमाने पर धान को नुकसान पहुंचा रहे हैं, तो यह पूरी प्रणाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
राजनीतिक हलकों में भी मचा घमासान
धान की कमी के इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने इसे बड़ा घोटाला करार देते हुए उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि चूहे-कीटों के नाम पर असल गड़बड़ी को छिपाया जा रहा है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि यह नुकसान प्राकृतिक कारणों और भंडारण की परिस्थितियों के चलते हुआ है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। यह देखना अहम होगा कि क्या वास्तव में चूहे और कीट ही इस करोड़ों रुपये के नुकसान के जिम्मेदार हैं या फिर इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने छत्तीसगढ़ की धान भंडारण व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



