केरल हाई कोर्ट ने मेंटल हेल्थ काउंसलर्स के लिए नियमों की मांग की

केरल हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय आयोग एक्ट 2021 के तहत मेंटल हेल्थ काउंसलर्स के लिए नियम लागू करने पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया मांगी है। यह नियम मेंटल हेल्थ काउंसलर्स की योग्यता निर्धारित करने और उनकी नियमितता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।
पीआईएल में योग्यता और लाइसेंसिंग की मांग
वायनाड की लेडी लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा दायर सार्वजनिक हित याचिका (पीआईएल) में योग्यता, लाइसेंसिंग, और पंजीकरण प्रणाली को लागू करने की मांग की गई है। पीआईएल में सभी मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर्स के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने और उनके पंजीकरण को अनिवार्य करने की बात कही गई है।
याचिका में इस अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने की भी गुहार लगाई गई है कि व्यक्ति को योग्य, पंजीकृत और उत्तरदायी मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार है। इसके साथ ही अयोग्य व्यक्तियों द्वारा काउंसलिंग और साइकोथेरेपी प्रदान करना इस अधिकार का उल्लंघन माना गया है।
डिजिटल प्लैटफॉर्म पर प्रदाताओं की जानकारी अनिवार्य
पीआईएल में सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत डिजिटल माध्यमों से मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले सभी प्लेटफार्मों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे अपने काउंसलर्स की पूरी जानकारी जैसे नाम, योग्यता, पंजीकरण संख्या और पंजीयनकर्ता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।
साथ ही सोशल मीडिया पर गलत दावे कर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस को जांच करने और उचित कार्रवाई करने के निर्देश भी मांगे गए हैं। ऐसी गैरकानूनी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए संबंधित सामग्री को भी हटाने की मांग की गई है।
पीठ के मुख्य न्यायाधीश सूमेन सेन और न्यायमूर्ति वीएम श्याम कुमार से बनी डिवीजन बेंच यह मामला देख रही है। कोर्ट केंद्र सरकार को इस मामले में जवाब देने के लिए नोटिस जारी कर चुकी है। जवाब मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
पीआईएल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाना है ताकि लोगों को सही और योग्य सेवाएं मिल सकें। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में इन बदलावों से सेवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
इससे पहले, कई बार अयोग्य काउंसलर्स और फर्जी सेवाप्रदाताओं की शिकायतें मिली हैं, जिनसे मरीजों को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए प्रभावी नियम और निगरानी प्रणाली की जरूरत को यह याचिका संबोधित करती है।
अब केरल हाई कोर्ट की तरफ से इस पर किया गया कदम मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि इससे सही दिशा में नियम बनेंगे और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी।




