बीएमसी चुनाव का परिणाम लोकतंत्र नहीं, महामूर्ख व्यवस्था की ताजपोशी : सुनील सिंह
महापौर और पार्षद अधिकारविहीन, असली सत्ता नौकरशाही के हाथों में – लोकदल राष्ट्रीय अध्यक्ष

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने बीएमसी चुनाव परिणाम को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएमसी चुनाव का परिणाम लोकतंत्र का उत्सव नहीं, बल्कि एक “महामूर्ख व्यवस्था” को वैध ठहराने की प्रक्रिया बन चुका है।
सुनील सिंह ने कहा कि बीएमसी में 227 पार्षद और एक महापौर चुने जाते हैं, लेकिन न पार्षदों के पास कोई वास्तविक सत्ता होती है और न ही महापौर के पास प्रशासनिक अधिकार। पूरी ताकत नौकरशाही के हाथों में कैद है, जिससे जनता की भूमिका केवल वोट डालने तक सीमित रह जाती है।
उन्होंने कहा कि हालात इतने विडंबनापूर्ण हैं कि अंग्रेजों के जमाने की राजशाही व्यवस्था भी इससे बेहतर थी, जहां जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होती थी। दुर्भाग्य है कि आज भी वही औपनिवेशिक ढांचा ज्यों का त्यों बना हुआ है, सिर्फ शासक बदल गए हैं, व्यवस्था नहीं।
लोकदल अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह चुनाव जनहित का नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित करने की कवायद है। बीएमसी के करीब 80 हजार करोड़ रुपये के बजट पर जनता का कोई नियंत्रण नहीं है। फैसले अधिकारी लेते हैं, राजनीतिक दल श्रेय बटोरते हैं और नुकसान आम मुंबईकर को झेलना पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि महापौर को केवल नाम का मुखिया बनाकर रख दिया गया है। उसके पास न अधिकार हैं और न ही प्रशासन पर कोई नियंत्रण। मुंबई की बदहाली पिछले वर्षों में इसी जवाबदेही-विहीन व्यवस्था का परिणाम है।
सुनील सिंह ने कहा कि बीएमसी चुनाव विकास का नहीं, बल्कि अधिकारविहीन कठपुतली चुनने का चुनाव बन गया है। जब तक महापौर को वास्तविक शक्तियां नहीं दी जाएंगी और नौकरशाही पर लोकतांत्रिक नियंत्रण स्थापित नहीं होगा, तब तक हर बीएमसी चुनाव जनता के साथ किया गया सुनियोजित मजाक ही रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई महापौर बनाम नौकरशाही की है और अब समय आ गया है कि जनता इस व्यवस्था को पहचाने और इसे पूरी तरह खारिज करे।



