
एक स्कैन और पूरी पढ़ाई: क्यूआर कोड से शिक्षा को नई दिशा दे रहीं शिक्षिका ऋचा उपाध्याय
डिजिटल युग में शिक्षा का बदला स्वरूप
आज का दौर तकनीक का है। मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जीवन को आसान बना दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। अब पढ़ाई केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रही। इसी डिजिटल बदलाव को जमीनी स्तर पर साकार कर रही हैं अयोध्या की शिक्षिका ऋचा उपाध्याय, जिन्होंने क्यूआर कोड के जरिए बच्चों की पढ़ाई को रोचक और सुलभ बना दिया है।
परंपरागत पढ़ाई से अलग पहल
अधिकांश सरकारी विद्यालयों में आज भी पारंपरिक शिक्षण पद्धति अपनाई जाती है। ऐसे में कई बार बच्चे कठिन विषयों को समझ नहीं पाते और पढ़ाई से दूरी बनाने लगते हैं। ऋचा उपाध्याय ने इस समस्या को गंभीरता से समझा और पढ़ाने के तरीके में नवाचार करने का निर्णय लिया। उन्होंने महसूस किया कि यदि पढ़ाई को दृश्य और श्रव्य माध्यम से जोड़ा जाए, तो बच्चों की समझ और रुचि दोनों बढ़ सकती हैं।
क्यूआर कोड से आसान हुई पढ़ाई
ऋचा ने कक्षा 1 से 8 तक के गणित, विज्ञान, जीव विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे विषयों की पाठ्य सामग्री को डिजिटल रूप में तैयार किया। इसके बाद क्यूआर जनरेटर एप की मदद से हर पाठ का क्यूआर कोड बनाया। बच्चे जैसे ही इस कोड को मोबाइल से स्कैन करते हैं, संबंधित वीडियो, ऑडियो, चार्ट और एनिमेशन उनके सामने आ जाते हैं। इससे विषयों को समझना आसान हो गया है।
कक्षा से बाहर भी जारी सीखने की प्रक्रिया
इस पद्धति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पढ़ाई अब केवल स्कूल तक सीमित नहीं रही। जो छात्र किसी कारणवश विद्यालय नहीं आ पाते, वे घर बैठे ही क्यूआर कोड स्कैन कर छूटे हुए पाठ पढ़ सकते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहती है और वे पीछे नहीं छूटते।
बच्चों में बढ़ी रुचि और सक्रियता
डिजिटल सामग्री के प्रयोग से कक्षा का माहौल पहले से कहीं अधिक जीवंत हो गया है। बच्चे पढ़ाई में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, सवाल पूछते हैं और विषयों पर चर्चा करते हैं। पढ़ाई अब उनके लिए बोझ नहीं, बल्कि एक दिलचस्प अनुभव बन गई है। इससे बच्चों में नियमित रूप से स्कूल आने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।
स्व-अध्ययन की आदत का विकास
ऋचा बताती हैं कि क्यूआर कोड आधारित शिक्षण से बच्चों में स्व-अध्ययन की आदत विकसित हुई है। वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय पाठ को दोबारा देख और समझ सकते हैं। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है और उनके सीखने के स्तर में भी सुधार हुआ है।
अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा
ऋचा उपाध्याय का यह नवाचार यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों में भी यदि सोच नई हो, तो शिक्षा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनका यह प्रयास अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है और भविष्य की शिक्षा की एक नई दिशा दिखाता है।



