
सब तक एक्सप्रेस।
मथुरा। ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम पर न सिर्फ देश के विभिन्न राज्यों में बल्कि पाकिस्तान में भी संपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। बांकेबिहारी हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के अनुसार मंदिर के नाम पर दर्ज सभी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी जुटाने के लिए व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
19 जनवरी को हुई कमेटी की 11वीं बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राजस्थान के कोटा में ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम पर रजिस्टर्ड लगभग 15 हेक्टेयर की कीमती जमीन प्राप्त हुई है।
हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार ने बताया कि कोटा की यह जमीन स्थानीय प्रशासन के सहयोग से मंदिर के नाम पर हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि मथुरा के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के नाम पर दर्ज सभी जमीनों का विवरण तैयार किया जाए और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सहयोग लिया जाए, ताकि मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित किया जा सके।
इतिहासकारों के अनुसार, ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की संपत्तियां वर्तमान भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के मुल्तान, शक्करगढ़ (सिंध) और सियालकोट क्षेत्रों में भी रही हैं। प्राचीन ग्रंथों ‘केलिमालजू’ और ‘स्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ’ में इन स्थानों पर मंदिर और हवेली होने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि भारत में संपत्तियों की खोज के साथ-साथ क्या पाकिस्तान में मौजूद संपत्तियों को लेकर भी कोई औपचारिक प्रयास किया जाएगा।
बताया जाता है कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के भक्तों ने सदियों से सेवा के रूप में बड़ी संख्या में भूमि, भवन और आभूषण दान किए हैं। 1592 में जयपुर नरेश सवाई मानसिंह ने तीन एकड़ भूमि, 1594 में मुगल सम्राट अकबर ने वृंदावन और राधाकुंड में 25 बीघा जमीन, 1595 में हरिराम व्यास ने किशोरपुरा में भूखंड, 1596 में मित्रसेन कायस्थ व उनके पुत्र बिहारिनदास ने बिहारिनदेव टीले की भूमि, 1748 में सवाई ईश्वरी सिंह ने 1.15 एकड़ जमीन, 1769 में भरतपुर और करौली सरकारों ने भूमि, 1780 में विंध्याचल राजपरिवार ने भूमि व आभूषण और 1785 में ग्वालियर रियासत ने भूमि-भवन दान किया था।
इसी क्रम में 1960 में राजस्थान के एक भक्त परिवार ने कोटा में 90 बीघा जमीन मंदिर को भेंट की थी। दिल्ली के फराशखाना क्षेत्र में मंदिर व भवन, तथा वर्तमान पाकिस्तान के मुल्तान और सियालकोट में प्राचीन मंदिर-हवेलियों के अवशेष होने की भी जानकारी सामने आती रही है।
कमेटी का कहना है कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की संपत्तियां श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उनका विधिवत संरक्षण और प्रबंधन सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।



