नौरोजाबाद में महाप्रबंधक कार्यालय के सामने क्रमिक अनशन शुरू
एमडीओ मोड में खदानें निजी कंपनियों को देने का आरोप, उमरिया सहित चार खदानों पर बंदी का खतरा

राहुल शीतलानी:ब्यूरो चीफ।
उमरिया। जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कोयला उद्योग पर संकट गहराता जा रहा है। एसईसीएल जोहिला क्षेत्र की पांच राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों ने खदानों को निजी कंपनियों को सौंपने के विरोध में 27 जनवरी से नौरोजाबाद स्थित महाप्रबंधक कार्यालय के सामने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है।
इस आंदोलन में इंटक, बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू शामिल हैं। इंटक के केंद्रीय उपाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने बताया कि यूनियनों की कुल 72 मांगें हैं, जिनमें एमडीओ और शेयरिंग पद्धति को समाप्त करना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि मात्र आधा एकड़ जमीन अधिग्रहण न होने का कारण बताकर उमरिया खदान को बंद करने की तैयारी की जा रही है, जबकि यह खदान 30 से 35 साल तक और चल सकती है।
यूनियनों का कहना है कि उमरिया, पिपरिया, पाली और नौरोजाबाद खदानों को आने वाले महीनों में बंद किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो जिले में बेरोजगारी तेजी से बढ़ेगी और स्थानीय व्यापार पर भी बुरा असर पड़ेगा।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि एमडीओ और शेयरिंग पद्धति से निजी कंपनियों को ज्यादा फायदा होता है, जबकि नुकसान की जिम्मेदारी एसईसीएल पर आती है। विरोध से बचने के लिए पहले खदानें निजी कंपनियों को दी जाती हैं और बाद में उन्हें बंद कर दिया जाता है।
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो एक फरवरी से पूरे जोहिला क्षेत्र में कोयला उत्पादन और परिवहन बंद कर दिया जाएगा।
जानकारों के अनुसार उमरिया खदान में अभी भी काफी कोयला मौजूद है, लेकिन पानी भरने से खनन प्रभावित है। यदि आधा एकड़ जमीन अधिग्रहण कर पानी निकाल दिया जाए तो खनन फिर से शुरू हो सकता है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
— सब तक एक्सप्रेस



