नौरोजाबाद नगर परिषद में “पैसा फेंक–तमाशा देख” की व्यवस्था?
काम के बदले 18 प्रतिशत मांगने के आरोप, कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

ब्यूरो चीफ, उमरिया – राहुल शीतलानी | सब तक एक्सप्रेस
उमरिया। जिले के नौरोजाबाद नगर परिषद से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार नगर परिषद में अब बिना “चढ़ावे” के कोई काम नहीं हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आम नागरिक फाइल लेकर कभी अधिकारियों के पीछे तो कभी कर्मचारियों के पीछे चक्कर काटने को मजबूर हैं।
सूत्र बताते हैं कि नगर परिषद कार्यालय में कथित तौर पर यह संदेश खुलेआम दिया जा रहा है कि “पहले पैसा लगेगा, तभी काम होगा, उसके बाद ही फाइल पर साइन होंगे।” आरोप है कि काम की कुल लागत का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा अवैध रूप से वसूला जा रहा है, जिसे अंदरखाने “खर्चा-पानी” का नाम दिया जा रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि नगर परिषद में प्रशासनिक अधिकारियों से ज्यादा प्रभाव कुछ कर्मचारियों का बताया जा रहा है, जो कथित रूप से पूरे सिस्टम को चला रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि बिना कर्मचारियों की “सहमति” के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती।
सूत्रों का यह भी दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ ऑडियो क्लिप सामने आ सकती हैं, जिनमें कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “काम कराना है तो दक्षिणा चढ़ानी पड़ेगी, तभी फाइल आगे बढ़ेगी।”
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल भ्रष्टाचार की गंभीर श्रेणी में आएगा, बल्कि शासन की “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” की नीति पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या नौरोजाबाद नगर परिषद में चल रही कथित “पैसा फेंक–काम देख” व्यवस्था पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
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