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Budget 2026: शेयर बायबैक टैक्स ने कैसे बदल दिया निवेश का पूरा गणित?

केंद्रीय बजट 2026 में शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स नियमों में किया गया बदलाव केवल एक कर-संशोधन नहीं है, बल्कि यह भारत के कॉरपोरेट और निवेश ढांचे में एक अहम नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सरकार ने बायबैक को लेकर वर्षों से चले आ रहे टैक्स आर्बिट्रेज को खत्म करने की कोशिश की है। इस फैसले का सीधा असर छोटे निवेशकों, प्रमोटरों और कंपनियों की वित्तीय रणनीतियों पर पड़ेगा।


बायबैक को लेकर सरकार की चिंता क्या थी?

अब तक कई कंपनियां डिविडेंड देने के बजाय बायबैक का रास्ता चुनती थीं। इसका मुख्य कारण टैक्स में अंतर था। डिविडेंड पर निवेशकों को सीधे टैक्स देना पड़ता था, जबकि बायबैक अपेक्षाकृत टैक्स-एफ्रेंडली तरीका बन गया था। प्रमोटर भी इसी रास्ते से अपनी हिस्सेदारी बेचकर कम टैक्स चुकाते थे। सरकार को यह असंतुलन लंबे समय से खटक रहा था।


बजट 2026 का नया टैक्स ढांचा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में ऐलान किया कि अब सभी शेयर बायबैक को कैपिटल गेन के तौर पर टैक्स किया जाएगा। यानी जिस तरह शेयर बेचने पर टैक्स लगता है, उसी तरह बायबैक से मिलने वाले लाभ पर भी टैक्स लगेगा। इसके अलावा प्रमोटरों के लिए एक अतिरिक्त बायबैक टैक्स भी लागू किया गया है।


छोटे निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?

रिटेल या माइनॉरिटी निवेशकों के लिए यह बदलाव काफी हद तक राहत भरा है। अब उन्हें केवल वास्तविक लाभ पर ही टैक्स देना होगा।
यदि किसी निवेशक ने शेयर 800 रुपये में खरीदा और 1,000 रुपये में बायबैक में टेंडर किया, तो केवल 200 रुपये प्रति शेयर के लाभ पर टैक्स लगेगा।
वहीं अगर बायबैक कीमत खरीद मूल्य से कम है, तो नुकसान को कैपिटल लॉस माना जाएगा, जिसे आगे के वर्षों में सेट-ऑफ किया जा सकता है।


प्रमोटरों पर क्यों लगाया गया अतिरिक्त टैक्स?

सरकार का मानना है कि प्रमोटर बायबैक का सबसे अधिक फायदा उठाते थे। वे इसे टैक्स प्लानिंग के टूल की तरह इस्तेमाल करते थे। इसी को रोकने के लिए प्रमोटरों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है।
नए नियमों के तहत:

  • कॉरपोरेट प्रमोटरों पर प्रभावी टैक्स लगभग 22%

  • गैर-कॉरपोरेट प्रमोटरों पर प्रभावी टैक्स लगभग 30%

इससे प्रमोटरों की टैक्स देनदारी साफ तौर पर बढ़ जाएगी।


कंपनियों की रणनीति में क्या बदलाव आएगा?

अब कंपनियां केवल टैक्स बचाने के लिए बायबैक का सहारा नहीं लेंगी। उन्हें डिविडेंड और बायबैक दोनों विकल्पों पर बराबर टैक्स प्रभाव को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा। इससे कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।


बाजार पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक असर

शुरुआत में कुछ कंपनियां बायबैक योजनाएं टाल सकती हैं, जिससे बाजार में हल्की अस्थिरता दिख सकती है। लेकिन लंबी अवधि में यह फैसला टैक्स सिस्टम को ज्यादा संतुलित बनाएगा और निवेशकों का भरोसा मजबूत करेगा।


निष्कर्ष

बजट 2026 में शेयर बायबैक टैक्स में बदलाव निवेश के गणित को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। जहां छोटे निवेशकों को इससे सुरक्षा और स्पष्टता मिलेगी, वहीं प्रमोटरों के लिए यह टैक्स प्लानिंग के पुराने रास्तों के बंद होने का संकेत है।

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