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मनरेगा को लेकर सीतापुर में प्रदर्शन, नए रोजगार कानून का विरोध

मनरेगा के 20 साल पूरे, प्रस्तावित रोजगार मिशन के विरोध में सड़कों पर उतरे मजदूर

विशेष संवाददाता: शैलेन्द्र यादव
सब तक एक्सप्रेस
सीतापुर। मनरेगा के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगतिन किसान मजदूर संगठन (एसकेएमएस) से जुड़े मजदूरों ने प्रस्तावित “विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूर कांशीराम कॉलोनी के पास एकत्र हुए, जहां से रैली निकालते हुए लालबाग चौराहा, गांधी पार्क और आंबेडकर पार्क पहुंचे। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया।


प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने काली पट्टी बांधकर और सिर पर तसला रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रस्तावित नया कानून लागू होने से मनरेगा के तहत मिलने वाला रोजगार प्रभावित होगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के बीच व्यय अनुपात में बदलाव तथा रोजगार को बजट से जोड़ने की व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई।


मजदूरों ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों, खासकर महिलाओं को रोजगार की सुरक्षा दी है। कोरोना काल जैसे कठिन समय में भी यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए सहारा बनी थी। ऐसे में मनरेगा के मौजूदा स्वरूप में किसी भी प्रकार का बदलाव मजदूरों के हितों के खिलाफ होगा।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि मनरेगा को कमजोर करने वाले किसी भी प्रस्ताव को वापस लिया जाए और योजना को उसके वर्तमान स्वरूप में जारी रखा जाए, ताकि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों को रोजगार की गारंटी मिलती रहे।
प्रदर्शन में रामबेटी, बिटोली, जमुना, जगन्नाथ, रामकिशोर, प्रकाश, पिंटू, साकरून, जसना, सुदामा, केश्काली, सुरेश, रामदेवी, राजराम, पप्पू, विद्यासागर, कुंती, रेशमा, दुर्गेश, रामसरन, सीता, रोशन, मंगूलाल, शांति, रामसेवक, उत्तम और राजेश सहित बड़ी संख्या में मजदूर शामिल रहे।

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