टोयोटा ने वित्त प्रमुख केंटा कोन को सीईओ के रूप में पदोन्नत किया है, जो तीन वर्षों में दूसरी बार नेतृत्व परिवर्तन है।

**दिल्ली में बढ़ रहा है प्रदूषण का संकट, सरकार ने उठाए ठोस कदम**
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर ने एक बार फिर से चिंता का विषय बना दिया है। हाल के दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने गंभीर स्तरों को पार कर लिया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई ठोस उपायों की घोषणा की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों से निकलने वाले धुएं और निर्माण कार्यों से उठने वाला धूल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह AQI कई क्षेत्रों में 300 के पार चला गया, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। ऐसे में शहरवासियों को सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को।
सरकार ने इस चुनौती का सामना करने के लिए एक व्यापक योजना बनाई है। इसमें प्रमुख रूप से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, वाहनों की जांच तथा सड़कों की सफाई को शामिल किया गया है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि स्कूलों में स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।
जैसे-जैसे प्रदूषण स्तर बढ़ता जा रहा है, नागरिक समाज भी इस मुद्दे पर जागरूक हो रहा है। कई एनजीओ और स्थानीय समूह प्रदूषण की समस्या के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चला रहे हैं। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने लोगों से सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और संभव हो तो सार्वजनिक परिवहन का ही सहारा लें।
दिल्ली सरकार की यह पहल निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या ये उपाय मौजूदा स्थिति को स्थायी रूप से सुधार पाएंगे? यह सवाल अब हर किसी के मन में है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है, जिसमें सरकार, नागरिक और उद्योग सभी की भागीदारी अनिवार्य है।
हालांकि, सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार के द्वारा उठाए गए ये कदम कितना प्रभावी साबित होंगे। आने वाले समय में, प्रदूषण को कम करने की दिशा में उठाए गए कदमों का परिणाम देखने के लिए सभी को इंतजार करना होगा।



