कोर्ड ट्रांसप्लांट और CAR T-सेल थेरेपी से कैंसर और थैलेसीमिया में नई सफलता

पश्चिम बंगाल की एक निजी स्वास्थ्य संस्था के डॉक्टरों ने थैलेसीमिया से पीड़ित सात वर्षीय लड़के का सफलतापूर्वक इलाज किया है। इस इलाज में एक उन्नत हाप्लो कॉर्ड ट्रांसप्लांट तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे बच्चे अब रक्त संक्रमण से मुक्त है।
थैलेसीमिया के लिए हाप्लो कॉर्ड ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया
इस बच्चे को HbE बीटा थैलेसीमिया था, जिसके कारण उसे हर महीने रक्त संक्रमण की आवश्यकता होती थी। उसके माता-पिता को “सेव द सिबलिंग” कार्यक्रम के तहत पंजीकृत कराया गया। इस प्रक्रिया में IVF और प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग के माध्यम से एक थैलेसीमिया मुक्त, अनुकूलित एचएलए वाली बहन या भाई का चयन किया गया, जो बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी होता है।
डॉक्टरों ने बच्चे के भाई की कॉर्ड ब्लड और पिता की कुछ स्टेम सेल्स लेकर हाप्लो कॉर्ड ट्रांसप्लांट किया। नारायणा हेल्थ के विशेषज्ञों ने इस ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया। इलाज के दौरान बच्चे को संक्रमण, म्यूकोसाइटिस, लिवर की समस्या और कम रक्त कोशिकाओं जैसी जटिलताएं आईं, जिन्हें सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया। अब बच्चा रक्त संक्रमण से पूरी तरह मुक्त है।
CAR T-सेल थेरेपी से दिमाग के कैंसर का इलाज
इसी स्वास्थ्य केंद्र ने म्यांमार के 62 वर्षीय पुरुष को ब्रेन कैंसर से निजात दिलाई है। शुरुआती संकेतों में उसे गलत चलने की समस्या आई, जिसके बाद उसकी जांच में प्राइमरी CNS लिम्फोमा जैसी दुर्लभ और आक्रामक नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा की पुष्टि हुई।
उच्च मात्रा की कीमोथेरेपी से संतोषजनक परिणाम न मिलने पर मरीज को CAR T-सेल थेरेपी दी गई। इस प्रक्रिया में लिम्फोसाइट संग्रह, रेडिएशन और अन्य दवाइयों के साथ संयोजन कर दोहरे CAR तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद CD19 और CD22 को लक्षित करती है।
नारायणा हेल्थ के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. जॉयदीप चक्रवर्ती ने कहा कि ये दोनों केस चिकित्सा विज्ञान में मील का पत्थर साबित हुए हैं। दोनों मरीजों की जान खतरे में थी, लेकिन उन्नत तकनीकों से उनकी जिंदगी बेहतर हुई है। उन्होंने बताया कि नारायणा हेल्थ हमेशा नई तकनीक अपनाने में अग्रणी रहा है।
कॉर्ड लाइफ साइंसेज इंडिया के लैब डायरेक्टर प्रसंता चौधरी ने बताया कि कॉर्ड ब्लड बैंकिंग जटिल मुद्दा है, जिसमें चिकित्सा, वित्तीय और नैतिक पहलुओं का संतुलन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परिवार के उपयोग के लिए निजी संग्रह और सार्वजनिक दान के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। यह दोनों सफल उपयोग इन चिंताओं को स्पष्टता और सहानुभूति के साथ हल करते हैं।
यह उपलब्धि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है जो थैलेसीमिया और ब्रेन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों की टीम ने उन्नत तकनीकों का उपयोग कर इन जटिल रोगों में नई दिशा दिखाई है। भविष्य में ऐसी ऊँची तकनीकों के इस्तेमाल से और भी मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकेगी।




