ब्रेन फॉग क्या है और कब इसकी जांच जरूरी होती है

ब्रेन फॉग मानसिक धीमापन की वह स्थिति है जिसमें ध्यान केंद्रित करने, सही शब्द याद करने या सूचनाओं को जल्दी संसाधित करने में कठिनाई होती है। यह कोई मेडिकल डाइग्नोसिस नहीं है, लेकिन जब ये लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी हो जाता है।
ब्रेन फॉग के लक्षण और अनुभव
ब्रेन फॉग में व्यक्ति को महसूस होता है कि उनका सोचने का तरीका धीमा हो गया है। वह किसी कार्य पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता, सोच का क्रम खो जाता है, या सही शब्द खोजने में समस्या आती है। यह थकान या सामान्य भूलने से अलग होता है। थकान में ऊर्जा कम लगती है, जबकि ब्रेन फॉग में ध्यान और याददाश्त जैसी मानसिक क्षमताएं प्रभावित होती हैं।
चेनई के रिल अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की एसोसिएट कंसल्टेंट श्रीविध्या एस. के अनुसार, ‘‘ब्रेन फॉग वह भावना है जब आप अपने दिमाग को धीमा महसूस करते हैं और रोजमर्रा के काम पहले की तरह तेजी से नहीं कर पाते।’’ फिर भी, कुछ स्मृति विकारों से इसका फर्क होता है क्योंकि परिवार वाले अक्सर ऐसे मामलों में बदलाव पहले देखते हैं।
एसआरएम प्राइम अस्पताल, चेनई की न्यूरोलॉजी कंसल्टेंट टी. स्वाथी बताती हैं कि ब्रेन फॉग वाले लोग सामान्य से कम सक्रिय महसूस करते हैं और यह उन्हें पता होता है। इसलिए यह अस्पष्ट या मामूली भूलों से अलग माना जाता है।
कारण और जांच के संकेत
ब्रेन फॉग के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खराब नींद, नींद की बीमारी जैसे स्लीप एप्निया, तनाव, चिंता और डिप्रेशन प्रमुख हैं। थायरॉयड विकार, डायबिटीज, एनीमिया, विटामिन बी12 और फोलेट की कमी भी इसके पीछे हो सकते हैं। हार्मोनल बदलाव तथा माइग्रेन भी इससे जुड़े होते हैं।
कुछ दवाएं जैसे स्लीपिंग पिल्स, एंटिहिस्टामाइन्स, और कुछ एंटी-सीजर दवाएं ब्रेन फॉग लक्षण बढ़ा सकती हैं। अल्कोहल सेवन और पानी की कमी भी स्थिति बिगाड़ सकती है। अपोलो अस्पताल, चेनई के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट अरुलसेलवन वी.एल. कहते हैं कि ‘‘ब्रेन फॉग के कई संभव कारण हैं और यह जरूरी नहीं कि हर बार यह न्यूरोलॉजिकल हो।’’
इंफेक्शन के दौरान या बाद में भी कॉगनिटिव समस्याएं हो सकती हैं। कोविड के लंबी अवधि वाले मरीजों में करीब 30% लोगों ने ब्रेन फॉग जैसी समस्या देखी है। क्योंकि यह कोई मेडिकल डाइग्नोसिस नहीं बल्कि एक लक्षण है, इसलिए अलग-अलग अध्ययनों में इसकी सटीक संख्या जानना मुश्किल है।
जब लक्षण अधिक समय तक लगातार बने रहते हैं, कामकाज या दैनिक जीवन प्रभावित होता है, तो डॉक्टर से जांच जरूरी होती है। बार-बार महत्वपूर्ण जानकारी भूल जाना, पुराने कामों में समस्या आना या बातचीत को समझने में दिक्कत होना गंभीर संकेत हैं। ऐसे मामलों में विस्तृत इतिहास और न्यूरोलॉजिकल जांच की जाती है। रक्त जांच, थायरॉयड, विटामिन स्तर और अन्य आवश्यक परीक्षण भी किए जाते हैं।
ब्रेन फॉग में एमआरआई या ब्रेन इमेजिंग आमतौर पर जरूरी नहीं होती, पर अगर लक्षण बढ़ते हैं या कोई अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्या नजर आती है तो इन्हें प्राथमिकता दी जाती है। अचानक बोलने में दिक्कत, चेहरे का झुकना, कमजोरी, दृष्टि समस्या या बेहोशी जैसी स्थितियां तुरंत चिकित्सा की मांग करती हैं क्योंकि ये स्ट्रोक जैसे गंभीर रोग का संकेत हो सकती हैं।




