श्रीनगर की कारीगर सिमरन इरशाद ने डल झील की जड़ी-बूटियों से बनाए Grass Mâché

श्रीनगर की कारीगर सिमरन इरशाद ने डल झील से निकाली गई जलजन्तु वनस्पतियों को उपयोग में लाकर Grass Mâché नामक एक नया शिल्प विकसित किया है। यह प्रयोग पुनर्नवीनीकरण कागज के मुकाबले एक सस्ता, स्थानीय और टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है। इस पहल का उद्देश्य महिलाएं रोजगार से जोड़ना भी है।
Grass Mâché: कागज की जगह वनस्पतियों का विकल्प
35 वर्षीय सिमरन इरशाद ने डल झील से निकाले गए जंगली पौधों को सूखाकर, उसे गूदा बनाकर और पुनर्नवीनीकृत कागज के साथ मिलाकर आकर्षक सजावटी वस्तुएं बनाना शुरू किया है। उनके अनुसार पारंपरिक कागज-निर्मित कागज माचे के मुकाबले इस नई सामग्री से लागत कम होती है और उत्पादन तेजी से हो सकता है।
सिमरन का यह विचार धीरे-धीरे उनके दिमाग में आया। उन्होंने कागज के बढ़ते दामों और कारीगरी के भविष्य को देखते हुए नए विकल्पों की तलाश शुरू की। वृक्षों से बने कागज पर निर्भरता कम करने और कारीगरी को जीवित रखने के लिए यह नया प्रयोग किया।
शिल्प और पर्यावरण संरक्षण का संगम
सिमरन ने दो साल से अधिक समय तक प्रयोग और सुधार कर इस प्रक्रिया को विकसित किया। डल झील की जड़ी-बूटियों को कागज के समान इस्तेमाल करने के लिए कई बार प्रयोग विफल हुए। अंततः उन्होंने ऐसी तकनीक बनाई जिससे यह प्राकृतिक वनस्पति कागज माचे का विकल्प बन गई।
उनका मानना है कि पेड़ काटकर कागज बनाया जाता है, जबकि जो वनस्पतियां वह झील से निकाल रही हैं, वह एक प्राकृतिक खजाना हैं। यह प्रयास कारीगरी को पारंपरिक रूप से जोड़े रखता है और साथ ही पर्यावरण के संरक्षण में भी मददगार है।
डल झील की सफाई से जुड़ी कारीगर का यह प्रयास श्रीनगर के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। सिमरन के अनुसार, डल झील का साफ-सुथरा रहना पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य केवल कारीगरी में बदलाव लाना ही नहीं है, बल्कि इस प्रक्रिया को सीखने के लिए महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण देना भी है। अब तक करीब 50 महिलाओं को इस कला में प्रशिक्षित किया गया है।
हालांकि उत्पादन को बढ़ाने में जगह, मशीनरी और बड़े बाजार तक पहुँच जैसे कई बाधाएं हैं, लेकिन सिमरन सरकारी सहायता और समर्थन की उम्मीद कर रही हैं। उनका मानना है कि महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के मामले में यह परियोजना काफी संभावनाएं रखती है।
Grass Mâché परियोजना कागज माचे की परंपरा को बनाए रखते हुए एक नई दिशा दे रही है। डल झील की वनस्पतियों को उपयोग में लाकर पारंपरिक हस्तशिल्प को स्थायी और महिलाओं के लिए आय का स्रोत बनाने का यह प्रयास एक सकारात्मक पहल साबित हो रहा है।




