असम और मेघालय ने 50 साल पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए समझौता किया
गुवाहाटी, असम। असम और मेघालय के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद समाप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। दोनों राज्यों ने 12 विवादित क्षेत्रों में से 6 बिंदुओं पर सहमति प्रकट कर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगाता है।
वर्षों से सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय जनता की जीवनशैली प्रभावित होने के कारण सरकारें विवाद को सुलझाने के प्रयास कर रही थीं। इस नई सहमति से न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
असम के मुख्यमंत्री और मेघालय के मुख्य मंत्री ने संवाद के माध्यम से विभिन्न पहलों पर चर्चा की और अंततः विवादित क्षेत्रों का दायरा कम करने पर सहमति व्यक्त की। यह समझौता दोनों राज्यों के लिए पारस्परिक सहयोग की नई मिसाल साबित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, विवादित सीमा रेखा को स्पष्ट करने से कैदीनुट क्षेत्रों में नियंत्रण स्थापित होगा और विकास कार्य सुचारू रूप से होंगे। स्थानीय लोगों की समस्याएं कम होंगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक स्थिरता बढेगी।
साथ ही, अधिकारियों ने सूचित किया कि शेष आधे विवादित बिंदुओं पर भी जल्द बातचीत होगी ताकि पूर्ण समाधान निकाला जा सके। राज्य सरकारें संकल्पित हैं कि इस मुद्दे को द्विपक्षीय संवाद से जल्दी और प्रभावी रूप से सुलझाया जाए।
स्थानीय निवासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और दोनों सरकारों से अनुरोध किया है कि वे शांति एवं सहकारिता बनाए रखें ताकि क्षेत्र में समृद्धि आए। इस पुनर्निर्धारित सीमा रेखा के बाद, दोनों राज्यों के बीच पर्यटन, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता पूर्वोत्तर भारत में स्थिरता और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकारों ने आश्वासन दिया है कि विवाद के शेष मुद्दों पर भी सकारात्मक बातचीत जारी रहेगी जिससे क्षेत्रीय शांति और विकास सुनिश्चित हो सके।
असम और मेघालय के बीच यह सीमा विवाद दशकों पुराना था जिसने दोनों राज्यों की प्रशासनिक और सामाजिक प्रगति को प्रभावित किया। अब जताई गई सहमति से उम्मीद की जा रही है कि पूर्वोत्तर भारत की इस महत्वपूर्ण सीमा समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा और क्षेत्र का विकास गति पकड़ेगा।

