दिल्ली पुलिस को 24 घंटे मॉनिटरिंग सेल बनाने को कहा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे लगातार निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सेल बनाने का निर्देश दिया है। यह कदम यौन अपराधों को रोकने के लिए उठाया गया है, खासकर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के मद्देनजर। अदालत ने इस दिशा में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में विशेष सतर्कता बढ़ाने को कहा है।
निगरानी और टीम का सुदृढ़ीकरण
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि केवल सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं होगा, अगर उनकी निरंतर निगरानी न की जाए। उन्होंने जोर दिया कि वायर रूम में 24 घंटे निगरानी केंद्र होना जरूरी है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर फौरन नियंत्रण किया जा सके।
बेंच ने बताया कि अपराध रोकने का मकसद तभी पूरा होगा जब कैमरों के जरिए संदिग्धों को पकड़ने के साथ-साथ अपराध को रोकने के लिए सतत नजर रखी जाए। उन्होंने कहा, “कैमरे अपराधी को पकड़ने में मदद करेंगे, पर अपराध कैसे रोका जाएगा अगर कोई लगातार नजर न रखे?”
संवेदनशील क्षेत्रों में चौकसी
अदालत ने विशेष रूप से शैक्षिक संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्रों में पुलिस की गश्त बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने अवैध ढाबों को भी चिन्हित करने और वहां आपराधिक तत्वों की गतिविधि रोकने का आग्रह किया। बेंच ने कहा कि कॉलेजों, स्कूलों के आस-पास गुनाहगार छात्राओं को परेशान करते हैं, इसलिए वहां विशेष निगरानी आवश्यक है।
दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया कि गश्त में कमियां हैं। उन्होंने कहा, “प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि गश्त में कुछ कमियां हैं।”
कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें नाबालिगों और महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की गई। कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि अपराध रोकने वाले अधिकारी जवाबदेह होंगे।
एक घटना के संदर्भ में, कोर्ट ने नई दिल्ली के अस्था कुंज पार्क के पास घटी 17 वर्षीय युवती के साथ गैंगरेप से पहले स्थानीय निवासियों द्वारा पुलिस को सुरक्षा की मांग उठाने पर ध्यान न दिए जाने का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने पुलिस से कहा कि उन्हें समाज के साथ सीधे संवाद करना होगा और सुरक्षा की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा।
न्यायमूर्ति पारदीवाला ने अपराधियों के मन में कानून का भय डालने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस को सतर्क रहना होगा ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।
वरिष्ठ अधिवक्ता लिज़ मैथ्यू ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस की ‘शिष्टाचार’ फोर्स मौजूद है, लेकिन इसके कामकाज और प्रभाव के बारे में सार्वजनिक जानकारी कम है। बेंच ने कहा कि केवल निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर सख्ती और क्रियान्वयन चाहिए।
अंत में, तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि पुलिस ने सतर्कता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की।




