जलवायु परिवर्तन बदल रहा है रोगों के पैटर्न, स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ रहा दबाव: रिपोर्ट

नई दिल्ली, भारत
भारत में चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है। एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि ये घटनाएं न केवल तत्काल खतरों को जन्म दे रही हैं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियां भी उत्पन्न कर रही हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे-जैसे भारत में बाढ़, गर्मी की लहरें, सूखा और भारी मानसून की घटनाएं तेज होती जा रही हैं, वैसे-वैसे लोगों की जीवन गुणवत्ता और स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है। इन चरम मौसम की घटनाओं का सीधे तौर पर बीमारियों के फैलाव, पोषण की स्थिति, पानी और स्वच्छता व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक बाढ़ और पानी भराव से जल जनित रोगों जैसे डेंगू, मलेरिया आदि के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। वहीं, लू की लहरें हृदय रोग और श्वास संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देती हैं। सूखे की स्थिति खेती पर भी प्रभाव डालती है जिससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है और दुर्भिक्ष की आशंका बढ़ती है।
स्वास्थ्य विभागों को इन परिवर्तित मौसम पैटर्न के चलते अधिक तैयारियां करनी पड़ रही हैं। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, दवाओं की अपर्याप्तता और स्वास्थ्य कर्मियों की भारी मांग जैसी समस्याएं उभर कर सामने आ रही हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण और गरीब इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंच संकटिल हो जाता है, जिससे सामाजिक असमानताएं गहरी होती हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, आपातकालीन योजना और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना होगा। साथ ही, जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है।
आखिरकार, जलवायु परिवर्तन की चुनौती केवल पर्यावरण की समस्या ही नहीं है, बल्कि यह हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भी गहन संकट बनती जा रही है। इसके बेहतर प्रबंधन के लिए समेकित प्रयासों और नीति निर्धारण की सख्त जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सकें।



