राजस्थान के रेगिस्तान में दो बंद पाले ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा गया

राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में रविवार, 3 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में स्वतंत्रता दिलाई। यह घटना पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो इन बंद पाले पक्षियों को प्रकृति में वापस लौटाने का परिश्रम दर्शाती है।
संरक्षण प्रयासों का परिणाम
इस पुनर्वास प्रयास की सफलता तक पहुंचने के लिए लगभग दस वर्षों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने निरंतर मेहनत की है। मंत्री यादव ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि यह उपलब्धि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में फिर से बसाने हेतु समर्पित प्रयासों की उपज है।
जैसलमेर की सैम और रामदेवरा में विकसित की गई इन पक्षियों की सुरक्षा एवं पालनपोषण की सुविधाएँ ही इस सफलता की आधारशिला हैं, जहां से इन्हें आज जंगल में छोड़ा गया।
सहयोगी संस्थाओं की भूमिका
यह संरक्षण योजना केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के संयुक्त प्रयासों से संचालित है। इन संस्थाओं की मदद से पक्षियों की देखभाल, प्रजनन और पुनर्वास की कार्यवाही की जा रही है।
वर्तमान में सैम और रामदेवरा में कुल 97 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड रखे गए हैं, जिनमें से 40 पक्षी जंगली अंडों से उत्पन्न हुए हैं और 57 पक्षी पिंजरे में प्रजनन के माध्यम से पाए गए हैं।
इनमें से 86 पक्षी प्रजनन के लिए रखे गए हैं जबकि 11 पक्षियों को जंगल में छोड़ने की योजना बनाई गई है। 2025 में पिंजरे में 24 जीवित चूजे और 2026 में 29 जीवित चूजे पैदा हुए हैं, जो प्रजनन प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।
मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया कि उनका मार्गदर्शन और समर्थन वैज्ञानिक समुदाय को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड समेत अन्य प्रजातियों के संरक्षण में निरंतर सहायता प्रदान कर रहा है।
यह कदम न केवल इन पक्षियों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि राजस्थान के विकारग्रस्त पर्यावरण को भी सहज और जैव विविधता से भरपूर बनाए रखने में वृद्धि करेगा। भविष्य में इस प्रकार के और भी संरक्षण कार्यक्रमों की उम्मीद है, जो जंगली जीवन और पर्यावरण के विकास में सहायक सिद्ध होंगे।




