महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के मन में डर पैदा करने की आवश्यकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अक्टूबर 2026) दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर चिंता जताई और कहा कि अपराध करने वालों के मन में डर पैदा करना आवश्यक है। न्यायालय ने यह बात राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच कही।
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जे.बी. पार्दिवाला और के. विनोद चंद्रन शामिल थे, ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराना जरूरी है। उन्होंने खासतौर पर कहा कि दिल्ली-एनसीआर की हर महिला को रात 11 बजे भी सड़क या मेट्रो पर यात्रा करते समय सुरक्षित महसूस करना चाहिए।
न्यायालय ने जोर दिया कि अपराध रोकना सबसे महत्वपूर्ण है न कि अपराध के बाद कदम उठाना। पुलिस को ऐसे अपराधियों और समाज विरोधी तत्वों के मन में भय उत्पन्न करना चाहिए जो महिलाओं के खिलाफ अपराध करते हैं।
राजधानी में हाल की घिनौन अपराधों का संज्ञान
कोर्ट ने पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-एनसीआर में हुई जबरन यौन उत्पीड़न और हत्या की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लिया था। इनमें आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ गैंगरेप, स्वारूप नगर क्षेत्र में किशोरी के साथ गैंगरेप और हत्या, तथा ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक चलती बस में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न शामिल हैं।
न्यायालय ने कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए बिल्कुल अस्वीकार्य हैं और इन मामलों से पता चलता है कि कानून प्रवर्तन संस्थाओं में कई जगह व्यवस्था विफल हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सभी घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा के लिए सिस्टम की खामियों को उजागर करती हैं और कानून को कड़ाई से लागू करना अब जरूरी हो गया है।
पीठ ने कहा कि समाज और प्रशासन को साथ मिलकर काम करना होगा ताकि महिलाओं को हर परिस्थिति में सुरक्षा मिल सके। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सतर्कता बढ़ाएं और दोषियों को कड़ी सजा दिलवाएं।
यह सुनवाई एक संवेदनशील मामला है जो महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम, सुरक्षा की गारंटी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता को दर्शाती है। राजधानी में सुरक्षित वातावरण बनाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।




