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केंद्र ने निजी लोगों को गणना गिनने वालों की नौकरियां दी, कांग्रेस ने RSS रोजगार योजना का आरोप लगाया

केंद्र सरकार ने हाल ही में जनगणना 2027 के लिए गणना गिनने वाले (एनेमरेटर) पदों को निजी व्यक्तियों समेत स्कूलों, संस्थाओं और ट्रस्ट के सदस्यों के लिए खोल दिया है। इससे पहले यह पद अधिकतर सरकारी स्कूल के शिक्षकों और सरकारी अधिकारियों के लिए आरक्षित रहते थे। इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे RSS और भाजपा के लिए रोजगार योजना बताते हुए विरोध किया है।

सरकार का नया निर्णय और उसकी वजह

केंद्र सरकार ने फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना की जनता को गिनने की प्रक्रिया (Population Enumeration) के लिए गणना गिनने वालों की भर्ती में बदलाव किया है। अब निजी स्कूलों के शिक्षक और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी गणना कार्य में शामिल हो सकेंगे। यह निर्णय इस बात को देखते हुए लिया गया है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में नहीं बढ़ी है, जिससे पर्याप्त वेतनभोगी कर्मचारियों की कमी हो रही है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्यों में यह गिनती 1 दिसंबर से 4 जनवरी 2027 तक होनी है। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और सरकारी शिक्षक चुनाव ड्यूटी पर होंगे, इसलिए निजी शिक्षकों को शामिल करना आवश्यक हो गया है।

कांग्रेस और पूर्व अधिकारी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक रोजगार योजना है जो RSS और भाजपा के कार्यकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है। उन्होंने बताया कि इससे पहले जनगणना में निजी लोगों को शामिल करने का कोई उदाहरण नहीं था क्योंकि जवाबदेही का सवाल उठता है।

पूर्व उप रजिस्ट्रार जनरल के नारायणन उनि ने कहा कि सरकारी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं है, इसलिए इस बार निजी शिक्षकों को शामिल किया गया है। लेकिन इससे जनगणना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं क्योंकि यह पहली बार है जब इस तरह के बदलाव किए गए हैं।

इस साल पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी और इसमें कई नई जानकारियां भी इकट्ठा की जाएंगी जैसे कि माता-पिता का जन्मस्थान, बैंक खाता संख्या, पासपोर्ट, आधार, मतदाता पहचान संख्या और ड्राइविंग लाइसेंस। साथ ही पहली बार जाति की गिनती 1931 के बाद पूरी तरह से की जाएगी।

हालांकि सरकार ने इस बदलाव को बरकरार रखते हुए कहा है कि इससे जनगणना के काम काज में तेजी आएगी। लेकिन इस फैसले को लेकर कई निजी स्कूलों के शिक्षकों ने अदालत का रुख किया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कुछ बयान जारी करते हुए निजी स्कूलों के कर्मचारियों को इस काम पर लगाने से विराम दिया है।

जनगणना के दौरान काम करने वाले कर्मियों को क्षेत्र में कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि गर्मी, नेटवर्क की समस्या और सुरक्षा चिंताएं। सतर्कता के बीच यह देखना होगा कि इस बार की जनगणना कितनी सफल और निष्पक्ष होती है।

जयराम रमेश ने इस फैसले और इसके आसपास की राजनीतिक गतिविधियों को RSS के प्रशिक्षण शिविर और जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति की ओर इशारा करते हुए एक योजनाबद्ध कदम बताया है जिसका मकसद व्यापक स्तर पर जनगणना को प्रभावित करना है। उन्होंने कहा कि इससे पहले ही चुनावों और मतदाता सूची के संशोधन में इस तरह की कई दिक्कतें आई हैं।

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