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निर्देशक कृष्णदास मुरली ने ‘भरतनाट्यम 2: मोहिनीअट्टम’ की सफलता पर अपने विचार व्यक्त किए

कोच्चि, केरल – भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सिनेमा प्रेमियों के लिए हाल ही में दो फिल्मों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। जबकि “भरतनाट्यम” एक पारिवारिक नाटक के रूप में आया था और बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता नहीं प्राप्त कर पाया, दूसरी ओर “मोहिनियट्टम” एक काली कॉमेडी के रूप में दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया लेकर आ रहा है।

भरतनाट्यम, जो पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य प्रणाली पर आधारित एक नाटकीय फिल्म थी, की कहानी भावनात्मक और घरेलू मुद्दों को लेकर बनी थी। फिल्म में कुछ अच्छी समीक्षा मिलने के बावजूद, इसकी कमाई औसत से नीचे रही। चर्चा है कि फिल्म का हल्का और सरल स्वरूप आधुनिक दर्शकों को पूरी तरह आकर्षित नहीं कर पाया।

वहीं, “मोहिनियट्टम” ने अप्रत्याशित रूप से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। यह एक काली कॉमेडी है, जिसमें सामाजिक मुद्दों को मनोरंजक एवं व्यंग्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। फिल्म की पटकथा और अभिनय दोनों को फिल्म प्रेमियों ने पसन्द किया है, जो इसकी सफलता का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

फिल्म के निर्देशक कृष्णदास मुरली ने भी इस सफलता पर खुशी जाहिर की है। उनकी मानना है कि “मोहिनियट्टम” की कहानी और उसके पात्र दर्शकों के दिल को छू गए हैं, विशेषकर युवा वर्ग में। उन्होंने कहा कि “हमने कोशिश की है कि पारंपरिक और आधुनिकता के बीच का संतुलन बनाए रखें, और दर्शकों की सोच को चुनौती दें।”

विशेषज्ञों का कहना है कि “मोहिनियट्टम” की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि दर्शक अब नए विषय और नए अंदाज की कहानियों को अपनाने लगे हैं। इसके अलावा, फिल्म की काले रंग की कॉमेडी शैली ने एक नया मार्ग प्रशस्त किया है, जो पारंपरिक भारतीय सिनेमा में कम देखने को मिलता है।

आने वाले दिनों में, “मोहिनियट्टम” के प्रदर्शन पर नजर रहेगी कि यह अपनी लोकप्रियता को और बढ़ा सकता है या नहीं। इस बीच, “भरतनाट्यम” की टीम भी संभावित नए प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, ताकि वे दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतर सकें।

समग्र रूप से, केरल की यह सिनेमा जगत में “मोहिनियट्टम” एक नई सफलता की कहानी बनती नजर आ रही है, जबकि “भरतनाट्यम” से मिली सीखें नए अनुसंधान और विकास के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।

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