ज्ञानेश कुमार ने देश को गुमराह किया, इस्तीफा देना चाहिए: डी. राजा

चुनाव आयोग के पद पर बैठे प्रमुख चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा है। इस मामले में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के महासचिव डी. राजा ने तत्काल इस्तीफे की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को इस मामले में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 बदलाव को लेकर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि संशोधित फॉर्म 6 को उसने मंजूरी नहीं दी है। यह बात चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस रिलीज के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बदलाव को स्वीकार किया है। इस फैसले के बाद आयोग की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
डी. राजा ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के नाम का गलत इस्तेमाल किया और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह शर्मनाक है कि चुनाव आयोग के प्रमुख ने देश को भ्रमित किया है। राजा ने कहा, “ज्ञानेश कुमार वोट चोर, झूठा और लोकतंत्र का मांसाहारी है।”
आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर असर
डी. राजा ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि फॉर्म 6 में बदलाव किसने किया और सुप्रीम कोर्ट का हवाला देने का झूठा दावा किसने मंजूर किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत में चुनावी लोकतंत्र को बचाना है तो ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। ये घटनाएं चुनाव आयोग के निष्पक्षता और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही हैं।
चुनाव फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं को पंजीकृत करने के लिए किया जाता है, इसलिए इसमें किये गए बदलाव बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। इसके बिना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
सीपीआई महासचिव डी. राजा की यह विवादित टिप्पणी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे पूरे राजनीतिक माहौल में हलचल मची है।
चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक पार्टियां इस विवाद को लेकर जवाब demand कर रही हैं और यह सवाल उठा रही हैं कि आयोग के फैसले कितने निष्पक्ष और भरोसेमंद हैं।
देश के चुनावी व्यवस्था में आयोग की भूमिकाएक अहम हिस्सीदारी है, इसलिए किसी भी स्तर पर उसकी विश्वसनीयता को ठेस पहुँचना लोकतंत्र के लिए खतरा है। डी. राजा के आरोपों से इस व्यवस्था का विश्वास कमजोर हो सकता है। इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।




