स्वास्थ्य

केंद्र ने आश्रय गृह निवासियों को गर्मी से बचाने के कदम उठाने को कहा

नई दिल्ली, भारत

केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शहरों में स्थित आश्रय गृह में रहने वाले निवासियों की गर्मी से सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं। मंत्रालय ने आश्रय गृहों में प्रशंसकों, जल वितरण यंत्रों और अन्य ठंडक सुविधाओं की सही व निर्बाध λειτουργία सुनिश्चित करने के लिए खासा जोर दिया है। यह कदम बढ़ती गर्मी और लू के प्रभाव से कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए उठाया गया है।

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि आश्रय गृह के कर्मचारियों को गर्मी से संबंधित बीमारियों के लक्षणों की पहचान और तत्काल प्रतिक्रिया के तौर-तरीकों की ट्रेनिंग दी जाए। इससे लू से पीड़ित व्यक्तियों की समय पर सहायता सुनिश्चित हो सकेगी और गंभीर स्थिति से बचाव संभव होगा। मंत्रालय की इस नई गाइडलाइन में यह भी उल्लेख है कि गर्मी के प्रकोप के दौरान नियमित रूप से सुविधाओं की जांच की जाए और किसी भी तरह की असुविधा तुरंत दूर की जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के महीनों में लू, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है, खासकर वे लोग जो खुले या असुविधाजनक अशय स्थिति में रह रहे हों। ऐसे में आश्रय गृहों में ठंडक की सही व्यवस्था और प्रशिक्षित स्टाफ जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।

अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक आश्रय गृह की स्थिति की रिपोर्ट नियमित रूप से केंद्रीय मंत्रालय को भेजें ताकि जरूरी सुधारों को तत्काल लागू किया जा सके। इसके अलावा, योजना बनाई जा रही है कि नियमित अंतराल पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को गर्मी से बचाव के उपाय बताए जाएं।

मंत्रालय की ओर से यह पहल शहरी गरीब एवं असहाय लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि यह दिशा-निर्देश शहरी आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करेंगे और गर्मी के प्रकोप में राहत पहुंचाएंगे।

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