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संकट मोचन संगीत समारोह में विभिन्न धर्मों के कलाकारों ने हनुमान के दरबार में जताई उपस्थिति

वाराणसी, उत्तर प्रदेश। संकट मोचन संगीत समारोह, जो इस वर्ष अपनी 103वीं सालगिरह मना रहा है, वाराणसी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत उदाहरण बना हुआ है। यह कार्यक्रम केवल एक संगीत उत्सव नहीं बल्कि सभी धर्मों और संस्कृतियों के मेल का प्रतीक बन चुका है, जहां भक्तिमय गीत और विविध संगीत शैलियाँ हनुमान जी के मंदिर में गूंजती हैं।

संकट मोचन मंदिर में आयोजित इस समारोह में देश-विदेश से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। विशेष रूप से इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां सभी धार्मिक आस्थाओं के कलाकार एक मंच पर एकत्रित होकर सांस्कृतिक विरासत और भक्ति भाव को साझा करते हैं। यह समानता और सौहार्द्र की भावना का परिचायक है।

कार्यक्रम के आयोजक बताते हैं कि संकट मोचन संगीत समारोह वाराणसी के समावेशी और सहिष्णु सामाजिक परिवेश को उजागर करता है। यह संगीत उत्सव स्थानीय लोगों के दिलों में प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का भी काम करता है। हनुमान जी के दरबार में होने वाली यह संगीत संध्या श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक शांति का स्रोत भी है।

इस वर्ष भी समारोह में भजन, कीर्तन, शास्त्रीय संगीत, और लोक संगीत की विविध प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ कलाकारों ने हनुमान भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि संगीत की यह रसधार सभी जनों तक सहज रूप से पहुंचे, जिससे लोगों में सांस्कृतिक अभिरुचि और आध्यात्मिक चेतना दोनों का विकास हो।

संकट मोचन संगीत समारोह की यह विरासत आगामी पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। यह न केवल धार्मिक आस्था बल्कि एकता, सहिष्णुता, और सांस्कृतिक विविधता का संगम प्रस्तुत करता है। वाराणसी की इस परंपरा ने यह साबित कर दिया है कि संगीत और भक्ति के माध्यम से विभिन्न मतों के लोग एक साथ आकर समाज में प्रेम और सौहार्द्र स्थापित कर सकते हैं।

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