अमेरिका एशियाई सहयोगियों के प्रति पीछे नहीं हट रहा, बल्कि उनकी रक्षा क्षमताओं में वृद्धि की उम्मीद करता है – हेगसेथ

सिंगापुर, एशिया
अमेरिका के रक्षा सचिव ने सिंगापुर में आयोजित एक एशियाई सुरक्षा सम्मेलन के दौरान अपनी देश की प्रतिबद्धता को दोहराया है और कहा है कि अमेरिका अपने एशियाई सहयोगियों के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका इन सहयोगियों से रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की उम्मीद रखता है, जिससे क्षेत्र में सामरिक संतुलन मजबूत हो सके।
इस सुरक्षा सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों ने अमेरिका के रक्षा मंत्री से उनके देश की क्षेत्रीय रणनीति तथा आगे की हथियार सौदों को लेकर सवाल किए। रक्षा सचिव ने जवाब दिया कि अमेरिका पिछड़े कदम नहीं उठा रहा है बल्कि वह सहयोगियों से अपेक्षा करता है कि वे अपने बचाव प्रणालियों को और सशक्त बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भरोसेमंद मित्र के रूप में आर्थिक और सैन्य दोनों माध्यमों से समर्थन जारी रखेगा।
पिछले कुछ वर्षों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए विभिन्न हथियार सौदों पर सहमति जताई है। यह रणनीति चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा सचिव ने सम्मेलन में कहा कि सहयोगियों के साथ संयुक्त अभ्यास और साझा खुफिया जानकारी अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा नीति में यह बदलाव क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्रों को मजबूत करने और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है। अमेरिका की यह रणनीति न केवल अपने रक्षा हितों की रक्षा करती है बल्कि सहयोगी देशों के संसाधनों और क्षमताओं को भी बढ़ावा देती है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि हथियारों और तकनीक के नए सौदे का मकसद क्षेत्र में सामरिक संतुलन बनाए रखना है, ताकि कोई भी देश अन्य पर बढ़त न हासिल कर सके। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अमेरिका सहयोगी देशों के साथ अपने संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
सारांशतः, अमेरिका ने एशियाई सुरक्षा सम्मेलन में अपने सामरिक हितों और सहयोगियों के साथ साझेदारी की प्रतिबद्धता को दोहराया, साथ ही यह संदेश भी दिया कि क्षेत्र के सहयोगी देशों को अपनी रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाना होगा। यह स्थिति एशिया के स्थिरता और सुरक्षा ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी हुई है।



