महाराष्ट्र में गाय-बैल खरीदना आसान पर घर ले जाना बना बड़ी चुनौती, क़ानून और गोरक्षकों के डर से संकट

मुंबई, महाराष्ट्र – महाराष्ट्र में मकोका (महाराष्ट्र किडनैपिंग और अवैध कारोबार रोकथाम अधिनियम) लागू होने के बाद से पशुओं के अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाये जा रहे हैं। इस नियम ने किसानों और पशुपालकों के लिए पशु खरीदना तो आसान कर दिया है, लेकिन उन्हें अपने खरीदे हुए पशुओं को घर तक सुरक्षित पहुंचाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मकोका के तहत, पशुओं के अवैध परिवहन में संलग्न व्यक्तियों को सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य गोवंश की रक्षा और अवैध कारोबार को कम करना है। हालांकि, इससे पशुओं के सामान्य परिवहन और खरीद-फरोख्त पर व्यापक असर पड़ा है। कई किसान शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कागजी कार्रवाई और लंबी जांच प्रक्रिया के कारण अपने पशुओं को ले जाने में दिक्कत हो रही है।
वहीं, गोरक्षक भी सक्रिय होकर संदिग्ध वाहनों की जांच कर रहे हैं, जिससे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। कुछ मामलों में तो इस भीड़-भाड़ और भय के कारण पशुओं को समय पर इलाज या पोषण नहीं मिल पा रहा है। किसानों के अनुसार, वे पूरी तरह नियमों का पालन करते हैं लेकिन प्रशासन और गोरक्षकों के बीच असहमतियों का शिकार हो रहे हैं।
पशुओं के परिवहन में आ रही प्रमुख समस्याएँ
- पालकों से जरूरी दस्तावेज की मांग बढ़ गई है जिससे देरी होती है।
- अधिकारियों और गोरक्षकों की सघन चैकिंग से डर लगा रहता है।
- कई बार संदिग्ध समझकर वाहन रोके जाने की घटनाएँ बढ़ी हैं।
- गाय-बैलों के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट व्यवस्था कम उपलब्ध है।
महाराष्ट्र सरकार के पशुपालन विभाग ने किसानों की समस्याओं को समझते हुए कहा है कि वे नियमों में अधिक स्पष्टता और सरलता लाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि किसानों को सहूलियत मिले। वहीं, अधिकारियों ने भी आग्रह किया है कि पशु पालक आवश्यक कागजात और नियमों का पूरी तरह पालन करें ताकि अवैध गतिविधियों के खतरे से बचा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोवंश की सुरक्षा के लिए कड़े नियम जरुरी हैं, परंतु किसानों की भी आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा। यदि नियमों में लचीलापन और बेहतर समझौता नहीं होगा तो यह संकट और बढ़ सकता है।
किसानों और पशुपालकों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को इस मामले में दोनों पक्षों के मध्य समान रूप से समाधान निकालना चाहिए जिससे गोवंश की सुरक्षा भी हो और किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।
इस स्थिति में मकोका के क्रियान्वयन के बाद पशुओं के परिवहन में सुधार और नियमों का तर्कसंगत पालन दोनों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक हो गया है। समय से सुधार न होने पर, महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्र इसके गंभीर प्रभावों का सामना कर सकते हैं।



