135 वर्ष पुरानी सेंट्रल सेक्रेटरियल लाइब्रेरी के स्थानांतरण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 135 वर्ष पुरानी केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के स्थानांतरण मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। यह पुस्तकालय, जिसे देश की सबसे पुरानी सरकारी लाइब्रेरी में से एक माना जाता है, केंद्रीय विस्टा पुनर्विकास योजना में जगह नहीं मिल पाने की रिपोर्टों के बीच यह कदम उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सुनवाई
शास्त्री भवन परिसर में स्थित इस पुस्तकालय को 17 सितंबर को परिसर खाली करने का निर्देश मिला था। इस आदेश के अनुसार, पुस्तकालय को 30 सितंबर तक स्थान छोड़ना था ताकि पुनर्विकास कार्य हो सके। मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की बेंच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के नोट के अनुसार, ‘‘योग्य प्राधिकारी (मुख्य न्यायाधीश) ने ताजा स्वत: संज्ञान याचिका दर्ज करने का आदेश दिया है।’’ इस याचिका का शीर्षक है ‘‘135 वर्षीय पुस्तकालय 8.5 लाख पुस्तकें–और नई केंद्रीय विस्टा योजना में कोई जगह नहीं।’’ यह याचिका 3 अक्टूबर को दर्ज की गई।
पुस्तकालय की स्थिति और पुनर्विकास योजना
केंद्रीय सार्वजनिक कार्य विभाग ने पुस्तकालय सहित शास्त्री भवन में कार्यरत अन्य मंत्रालयों को 17 सितंबर को आदेश दिया कि वे अपने फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामान हटा कर खाली परिसर सुपुर्द करें ताकि भवन को तोड़कर नया बनाया जा सके।
चार मंजिलों में फैला लगभग 5,500 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला यह पुस्तकालय 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों का भंडार है। इसमें दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी रिकॉर्ड और गैजेटियर शामिल हैं, जिन्हें सरकारी अधिकारियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा नियमित रूप से पढ़ा जाता है।
1891 में स्थापित यह पुस्तकालय मूल रूप से कलकत्ता में था और तब इसे इम्पीरियल सेक्रेटेरियल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता था। 1911 में भारत की राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद इसे पुराने सचिवालय भवन, फिर नॉर्थ ब्लॉक से शास्त्री भवन में 1969 में स्थानांतरित किया गया।
हालांकि, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पुनर्विकास योजना में पुस्तकालय के लिए जगह पहले से ही निर्धारित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पुस्तकालय के निर्माण के लिए आवश्यक प्रक्रिया चल रही है, लेकिन योजना में इसका स्थान कहाँ होगा, यह स्पष्ट नहीं किया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुस्तकालय के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह देश के सांस्कृतिक और शैक्षिक संसाधन के संरक्षण की दिशा में संकेत देगा। अब देखना यह होगा कि पुनर्विकास योजना में इस ऐतिहासिक पुस्तकालय के लिए कब और कैसे नया स्थल उपलब्ध कराया जाएगा।




