हार्वर्ड विशेषज्ञ ने बताया कैसे दिनचर्या के काम ध्यान का रूप बन सकते हैं

हार्वर्ड के मास्टर मोनिका सैनफोर्ड ने बताया कि कैसे रोज़मर्रा की गतिविधियों में ध्यान की प्रैक्टिस की जा सकती है। मोनिका सैनफोर्ड, जो हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल में मिनिस्ट्री स्टडीज की लेक्चरर और असिस्टेंट डीन हैं, ने बताया कि माइंडफुलनेस का अभ्यास हमेशा चुप-चुप कमरे में नहीं होता, बल्कि सामान्य कामों को जागरूक होकर करना भी ध्यान हो सकता है।
बौद्ध विचारधारा में माइंडफुलनेस का महत्व
सैनफोर्ड के अनुसार, माइंडफुलनेस का सिद्धांत बौद्ध दर्शन से जुड़ा है जिसे पाली भाषा में ‘सती’ कहा जाता है। यह अभ्यास व्यक्ति को जागरूक बनाने, अपने कर्मों के उद्देश्य समझने और मानसिक विचलन से बचने की शिक्षा देता है। बौद्ध शिक्षाओं में माइंडफुलनेस केवल मानसिक शांति नहीं बल्कि नैतिकता और करुणा से भी जुड़ी है।
मोनिका ने बताया कि इससे आप समझ पाते हैं कि आप कहाँ हैं, क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। यह अभ्यास मन को परेशान करने वाले विचारों से हटकर वर्तमान क्षण में बनाए रखता है।
दिनचर्या के साधारण काम भी ध्यान का रूप बन सकते हैं
सैनफोर्ड ने कहा, “आपको ध्यान के लिए ज़रूरी नहीं कि पारंपरिक मुद्रा में बैठें या कोई निश्चित दिनचर्या अपनाएं।” वह कहती हैं कि जब आप कोई भी काम जैसे बर्तन धोना, टहलना या कपड़े तह करना पूरी तरह से ध्यान से करें तो वह एक प्रकार का ध्यान बन जाता है।
वह सलाह देती हैं कि बर्तन धोते समय पानी की गर्मी, हाथों की गति और आस-पास की आवाज़ों पर ध्यान दें। टहलते समय अपने आसपास के दृश्य, खुशबू और आवाज़ों को महसूस करें बजाय फोन देखने या संगीत सुनने के।
साठfname गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस जैसे आपस में सहज ध्यान के तरीकों को भी अपनाने का सुझाव दिया। वह बताती हैं कि ध्यान कितनी भी छोटी अवधि का क्यों न हो, नियमित अभ्यास से इसका प्रभाव बढ़ता है।
माइंडफुलनेस क्यों है तनाव मुक्ति से अधिक महत्वपूर्ण
मोनिका सैनफोर्ड के अनुसार, माइंडफुलनेस केवल मानसिक तनाव कम करने की तकनीक नहीं है। यह आपको विचारों और भावनाओं के बीच फ़र्क़ समझकर ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
साथ ही, यह करुणा और सहानुभूति को भी विकसित करता है, जिससे आप दूसरों के दुख को समझ पाते हैं और उनकी मदद करना चाहते हैं।
शुरुआती अभ्यास के लिए वह दिन में पाँच मिनट का माइंडफुल वॉक या किसी रोज़मर्रा के काम में पूरी तरह से उपस्थित रहने की सलाह देती हैं। इससे धीरे-धीरे ध्यान का अभ्यास आपकी जिंदगी का हिस्सा बन सकता है।




