मध्य पूर्व संघर्ष के बीच केरल के निर्यात पर भारी फ्रेट खर्च का असर

केरल के मसाले, कोयर, जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं, सब्जियां, रबड़ एवं रबड़ उत्पादों के निर्यात को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण बढ़े हुए एयर फ्रेट शुल्क से गंभीर चुनौती मिली है। निर्यात लागत में इस वृद्धि के कारण विदेशी बाजारों में केरल के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हुई है और खरीदार ऑर्डर देने में हिचकिचा रहे हैं।
फ्रेट लागत में वृद्धि से प्रभावित निर्यात
राज्य के चार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से निर्यातित माल की मात्रा में पिछले तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। जुलाई से सितंबर 2026 तक कुल 27,425 टन माल का निर्यात हुआ, जो पिछले वर्ष के समान अवधि के 26,416.7 टन से केवल 3.8% अधिक है। परंपरागत रूप से यह वृद्धि दर 5-10% के बीच रहती है।
ऊंचे परिवहन खर्च ने माल की कीमतें बढ़ा दी हैं, जो विशेषकर जलवायु संवेदनशील वस्तुओं जैसे मसालों और ताजा सब्जियों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। निर्यातकों को अब अधिक लागत वहन करनी पड़ रही है, जबकि ग्राहक उच्च कीमत पर ऑर्डर कम कर रहे हैं।
निर्यात क्षेत्र की चुनौतियां और प्रभाव
केरल के निर्यात क्षेत्र में एयर कार्गो की घटती मात्रा से स्पष्ट होता है कि बढ़ती फ्रेट दरें व्यवसाय को प्रभावित कर रही हैं। इस स्थिति में निर्यातकों को विपरीत परिस्थितियों से निपटने तथा लागत नियंत्रण के उपाय तलाशने होंगे।
पश्चिम एशिया के संघर्ष के चलते एयर फ्रेट की बढ़ोतरी के साथ ही समुद्री मार्गों पर भी जहाजी परिवहन प्रभावित हुआ है। यह दोनों कारण मिलकर केरल के निर्यात क्षेत्र को दबाव में लाए हैं।
सरकार और संबंधित विभागों को निर्यातकों को सहायता प्रदान करने तथा लागत को कम करने के लिए रणनीतियाँ विकसित करनी होंगी ताकि प्रदेश के किसानों और व्यवसायियों को लाभ हो सके।
निर्यात क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिवहन बाधाएं अस्थाई हैं और जल्द ही स्थिति सामान्य होने की संभावना है। इसके बावजूद, निर्यातकों को अब अपने बाजार विस्तार एवं लॉजिस्टिक प्रबंधन में सुधार करना अनिवार्य होगा।
इस चुनौतीपूर्ण समय में निर्यातकों का सहयोग और प्रभावी नीति निर्धारण केरल की अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। आगामी तिमाही के आंकड़ों से ही इस संकट का पूरा प्रभाव समझ में आएगा।




