सरकार से वार्ता विफल होने पर पाकिस्तान में इमरान खान समर्थकों का प्रदर्शन तय

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थकों द्वारा सरकार से बातचीत विफल रहने के बाद 4 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की तैयारी है। यह प्रदर्शन खैबर पख्तुनख्वा प्रांत से लेकर इस्लामाबाद तक लंबी मार्च का रूप लेगा।
सरकार और पार्टी के बीच वार्ता
शुक्रवार को हुई वार्ता में दोनों पक्षों ने अपनी मांगें रखीं, लेकिन कोई संधि नहीं बनी। पार्टी ने खान को अस्पताल में इलाज के लिए स्थानांतरित करने और उनके निजी डॉक्टरों को मिलने की मांग की, जबकि सरकार प्रदर्शन रद्द करने की अपेक्षा कर रही थी।
शनिवार को हुई दूसरी बैठक भी परिणामहीन रही और रविवार को पुलिस और सुरक्षा की कड़ी तैयारी के बीच प्रदर्शन तय हो गया। खान कई आरोपों में जेल में हैं और उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं उठ रही हैं।
प्रदर्शन की तैयारी और विभिन्न मांगें
खैबर पख्तुनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने घोषणा की कि प्रदर्शन 4 अक्टूबर को शुरू होगा और पार्टी समर्थक विभिन्न इलाकों से इस्लामाबाद के लिए मार्च करेंगे। इस मार्च में टैंक, डेरा इस्माइल खान, वजीरिस्तान, बानू और लकी मरवाट के लोग शामिल होंगे।
पार्टी ने खान की बहनों और अन्य समर्थकों की रिहाई, पत्नी बुशराकर बीबी के स्वास्थ्य परीक्षण और उनके मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई की भी मांग की है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अगस्त में खान को निजी अस्पताल में इलाज देने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने प्रोटोकॉल और सुरक्षा कारण बताते हुए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरण नहीं किया। इसके चलते पार्टी ने सरकार के खिलाफ कोर्ट में आपत्ति जताई है।
सरकार की ओर से मंतव्य यह था कि प्राथमिकता आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग की है, खासकर खैबर पख्तुनख्वा प्रांत में, जहां पार्टी सरकार चला रही है। पार्टी और सरकार की नीतियां और मांगें अलग हैं, जिससे बैठकें निष्फल रही हैं।
प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार राना सनाउल्लाह ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और मार्गों पर कंटेनर रखे गए हैं।
इस प्रदर्शन का असर पूरे देश में राजनीतिक संकट को बढ़ा सकता है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां सजग हैं और हालात को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान संभावित हिंसा को रोकना प्राथमिकता होगी।




