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तमिलनाडु के सीएम विजय के चुनाव याचिकाओं को मद्रास उच्च न्यायालय ने सुना

मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार, 5 अक्टूबर, 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। यह याचिकाएं परांबुर विधानसभा क्षेत्र से विजय की जीत को चुनौती देने वाली हैं।

मुख्य याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई

न्यायाधीश वी. लक्ष्मीनारायणन के समक्ष कुल तीन चुनाव याचिकाएं हैं, जिनमें मतदाता एस. दिनेश, टी.एन. लक्ष्मी नरसिम्हन, और डीएमके के हारने वाले उम्मीदवार आर.डी. शेखर की याचिका शामिल हैं। ये सभी याचिकाएं मुख्यमंत्री विजय की परांबुर में 53,715 वोटों से हुई जीत को चुनौती देती हैं।

इसके अलावा, डीएमके उम्मीदवार एस. इनिगो इरुदयराज ने भी एक चुनाव याचिका दायर की है, जो तिरुची ईस्ट विधानसभा क्षेत्र में विजय की जीत को चुनौती देती है। विजय ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था और तिरुची ईस्ट क्षेत्र से निर्वाचित होने के बाद वहां से इस्तीफा दे दिया था।

सुनवाई की प्रक्रिया और वकीलों के तर्क

सीएम विजय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ श्रीदेवन ने कोर्ट से अनुरोध किया कि हर याचिका को क्रमवार सुना जाए क्योंकि याचिकाओं में कुछ भिन्नताएं थीं। अदालत ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर पहले एस. दिनेश की याचिका पर सुनवाई शुरू की और फिर टी.एन. लक्ष्मी नरसिम्हन की याचिका पर विचार किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन, जिनकी टीम में प्रांजल अग्रवाल और दीक्षित गोहिल शामिल थे, ने पहला चुनाव याचिका खारिज करने के लिए तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अपनी सम्पत्तियों और देनदारियों का पूरा और सही खुलासा करने के खिलाफ लगाई गई कोई भी आरोप टिका नहीं।

श्री शंकरनारायणन ने 1999 में जारी 170वें विधि आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद आए कतरन न्यायनिर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह नियम काफी समय से लागू हैं और इसका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना है।

हालांकि, वह सोमवार को अपने तर्क समाप्त नहीं कर पाए और आगामी सुनवाई के लिए समय मांगा। न्यायाधीश ने उनकी बात सुनी और मंगलवार को उन्हीं के तर्क जारी रखने का निर्णय लिया। इसके बाद चुनाव याचिकाकर्ता के वकील वी.आर. शन्मुगनाथन को अपनी दलीलें रखने का मौका मिलेगा।

इस सुनवाई से तमिलनाडु की राजनीतिक सूरत पर असर पड़ने की उम्मीद है क्योंकि यह मुख्यमंत्री विजय की चुनावी जीत को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अगली सुनवाई के बाद अदालत इन याचिकाओं पर अपना निर्णय दे सकती है जो क्षेत्रीय राजनीति के लिए अहम है।

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