विजय की शानदार शुरुआत: हिंदी तमिलनाडु राजनीति में सिनेमा की भूमिका

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तिरुपतूर, शिवगंगा जिले में मतगणना ने एक अनोखा नजारा पेश किया, जैसा कि अभिनेता विजय की फिल्मों में देखते हैं। यहां तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) के प्रत्याशी ने सिर्फ एक मत से अपनी जीत दर्ज की। यह राजनीतिक लड़ाई उस मशहूर 2018 की फिल्म सर्कर की कहानी जैसा प्रतीत हुआ, जिसमें एक कॉरपोरेट अधिकारी मतदान के बाद राजनीति में उतरता है।
विजय की फिल्म और राजनीति का संगम
यह विजय का असली जीवन में राजनीतिक प्रवेश भावुक समर्थकों के लिए एक बड़ी सफलता रही। 51 वर्षीय अभिनेता ने दो दशकों से अधिक समय तक फिल्म की चमक-दमक को छोड़ इस राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखा। उनके नेतृत्व वाली TVK पार्टी ने बुनी अपनी मजबूत लोकप्रियता और स्टार पावर के दम पर 108 सीटें हासिल कीं, जो कई पूर्व मुख्यमंत्री और फिल्म सितारों जैसे एमजी रामचंद्रन और जयललिता की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
टीवीके की यह सफलता केवल विजय की बेहतरीन चुनावी रणनीति या जनादेश के लिए दिये गए वादों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनकी फिल्मों में दिखाई गई सामाजिक और राजनीतिक संदेश की भी अहम भूमिका है। विजय की फिल्मों ने जनमानस में नेतृत्व की छवि मजबूत की और उन्हें जनता के साथ जोड़ा।
फिल्मों से राजनीति तक का सफर
2002 की तमिझन फिल्म में विजय ने एक वकील की भूमिका निभाई थी जो सामाजिक जागरूकता बढ़ाता है। 2013 की थलाइवा फिल्म, जिसका अर्थ है ‘नेता’, भी उनकी राजनीतिक छवि को मजबूत बनाने में कारगर साबित हुई। इस फिल्म को रिलीज़ में कई राजनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा, जो उनके राजनीतिक सफर को दर्शाता है।
2014 में आई कठ्ठी फिल्म ने किसानों की समस्याओं को उठाया और विजय के राजनीतिक दल का पहला मजबूत संदेश दिया। 2026 में रिलीज़ हुई जन नायक, जिसे उनकी राजनीति की अंतिम फिल्म माना गया, जिसमें उनके राजनीतिक संघर्षों का भाव भी दिखाया गया।
जैसे उनके प्रशंसक, जैसे मोहम्मद अशिक, जिन्होंने बताया कि थलाइवा जैसी फिल्मों के दृश्यों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। विजय के फैंस ने फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो तक सामाजिक मंचों पर सक्रियता दिखाकर उनकी लोकप्रियता को ऊंचा किया।
सरकार द्वारा सेंसर सर्टिफिकेट की देरी और फिल्मों के लीक्स ने विजय के प्रति सहानुभूति बढ़ाई। फिल्मकार रत्नकुमार ने बताया कि अधिकतर फिल्मी लोग इस संकट में उनके साथ थे, जो न केवल पैसे बल्कि भावना का मामला था।
अब विजय राजनीति में मुख्य भूमिका निभाने जा रहे हैं और उनके पिता एसए चंद्रशेखर ने कहा कि वोटर्स उन्हें एक नेता नहीं, बल्कि भाई की तरह देखते हैं। आगामी समय में विजय के लिए राजनीति चुनौतीपूर्ण रहेगी, लेकिन उनके प्रशंसक काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं। क्या यह राजनीतिक यात्रा भी उनकी फिल्मों की तरह सफलता से भरी होगी? यह आने वाला समय बताएगा।




