
ब्यूरो चीफ, सतीश पाण्डेय
सोनभद्र:
जनपद सोनभद्र में स्थापित बड़ी औद्योगिक इकाइयों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि हिंदाल्को, अडानी, एसीसी, अल्ट्राटेक सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों में हो रही भर्तियां भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 की भावना के विपरीत हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है।
लोकेश उपाध्याय ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता और रोजगार में समान अवसर का अधिकार देता है, लेकिन सोनभद्र में योग्य और प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर अन्य राज्यों व जनपदों के लोगों को कथित रूप से धन लेकर रोजगार दिया जा रहा है। यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह न केवल संविधान का उल्लंघन है, बल्कि श्रम कानूनों, औद्योगिक नीति और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर भी सीधा प्रहार है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनपद के विधायक, सांसद और मंत्री सत्ता पक्ष से हैं, तब भी स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा क्यों नहीं हो रही। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी संदेह को और गहरा करती है तथा यह आभास देती है कि कहीं न कहीं इस व्यवस्था को मौन स्वीकृति मिली हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि सोनभद्र जैसे पिछड़े और आदिवासी बहुल जनपद में यदि स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के बावजूद रोजगार से वंचित किया जाता है, तो यह संविधान के मूल ढांचे—समानता और सामाजिक न्याय—के खिलाफ है। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अभाव ने पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
लोकेश उपाध्याय ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और श्रम विभाग से मांग की कि औद्योगिक इकाइयों की भर्ती प्रक्रिया की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता सुनिश्चित की जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनियों व व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी विधिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय युवाओं के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जनआंदोलन और विधिक कदम उठाए जाएंगे।



