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लखनऊ। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ ने एक बार फिर मृतक आश्रितों को योग्यता के आधार पर नियुक्ति दिए जाने की मांग को जोर-शोर से उठाया है। महासंघ के प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने कहा कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली में किया गया 14वां संशोधन योग्यता का हनन है, जिससे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी समाज में भारी रोष व्याप्त है।
उन्होंने बताया कि नियमावली में किए गए संशोधन के अनुसार अब मृतक आश्रित को उसी समूह (ग्रुप सी या डी) में नौकरी मिलेगी, जिसमें मृत कर्मचारी कार्यरत था। भले ही आश्रित की शैक्षिक योग्यता अधिक हो, उसे उच्च समूह (ग्रुप ए या बी) में नियुक्ति नहीं दी जाएगी। इससे पहले योग्यता के आधार पर उच्च पद पर नियुक्ति का प्रावधान था, जिसे समाप्त कर दिया गया है। कर्मचारी संगठनों द्वारा इस संशोधन का लगातार विरोध किया जा रहा है।
प्रदेश महामंत्री ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक को पत्र लिखकर नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि आज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हजारों बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में योग्यता के अनुसार नियुक्ति न दिया जाना नैसर्गिक न्याय के विपरीत है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में लगभग 5 लाख चतुर्थ श्रेणी के पद रिक्त हैं, जिसके कारण कई विभागों का सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। इन पदों पर नियमित नियुक्ति कर सरकार रोजगार देने के अपने वायदों को पूरा कर सकती है। वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत पदों पर संविदा के माध्यम से कार्य कराया जा रहा है, जिससे निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है और कर्मचारियों में असंतोष है।
प्रदेश महामंत्री ने बताया कि वर्ष 2001 तक दैनिक वर्कचार्ज कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश जारी हुए थे, लेकिन आज भी कई विभागों में उन्हें नियमित नहीं किया गया है। उद्यान विभाग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहां 184 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी आज भी नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 18 नवंबर 2024 को प्रमुख सचिव कार्मिक की सहमति से 1900 ग्रेड पे सामूहिक रूप से देने और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवा आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का प्रस्ताव पारित हुआ था, जो वर्तमान में शासन स्तर पर लंबित है। कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से अपील की कि सभी विभागों को कड़े निर्देश जारी कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के उत्पीड़न को रोका जाए और उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर में कर्मचारियों के आक्रोश को देखते हुए जिलाधिकारियों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपने पर विचार किया जाएगा।



