स्थापना दिवस पर भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में संगोष्ठी आयोजित

सब तक एक्सप्रेस।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के 49वें स्थापना दिवस के अवसर पर मंगलवार को हिन्दी भवन, निराला सभागार में भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वाह्न 10.30 बजे दीप प्रज्वलन, माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. गीता शुक्ला द्वारा वाणी वंदना प्रस्तुत की गई।
संगोष्ठी में अतिथि के रूप में डॉ. विद्या विन्दु सिंह, डॉ. सुधाकर अदीब, डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह एवं विनय श्रीवास्तव उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की प्रधान सम्पादक डॉ. अमिता दुबे ने उत्तरीय एवं स्मृति चिह्न भेंट कर किया।
अपने विचार रखते हुए डॉ. विद्या विन्दु सिंह ने कहा कि भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व सरल, सौम्य और प्रेरणादायी था। उन्होंने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, ठाकुर प्रसाद सिंह और रमाकांत श्रीवास्तव के साहित्यिक योगदान पर भी प्रकाश डाला। डॉ. सुधाकर अदीब ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रेष्ठ कवि, महान राजनेता और साहित्य का अप्रतिम व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उनकी भाषण कला और काव्य रचनाएँ आज भी प्रेरणा देती हैं। उन्होंने अटल जी की चर्चित कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके विचारों में कभी कटुता नहीं रही।
डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह ने ठाकुर प्रसाद सिंह के साहित्यिक जीवन, उनकी भाषा शैली और स्वाभिमान पर विस्तार से चर्चा की। वहीं विनय श्रीवास्तव ने रमाकांत श्रीवास्तव को एक उत्कृष्ट संपादक और साहित्यानुरागी बताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की पत्रिकाओं के माध्यम से साहित्य को नई दिशा दी।
कार्यक्रम के दौरान आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी कृत बाणभट्ट की आत्मकथा के अंशों का पाठ अर्चना एवं सुशील द्वारा किया गया। इसके साथ ही ठाकुर प्रसाद सिंह, रमाकांत श्रीवास्तव एवं अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का पाठ रत्नमाला और सुश्री निर्मला कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रोताओं ने सराहा।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अमिता दुबे ने संगोष्ठी में उपस्थित सभी साहित्यकारों, विद्वज्जनों एवं मीडिया कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी ने अटल बिहारी वाजपेयी के साहित्यिक एवं राष्ट्रीय योगदान को स्मरण करते हुए हिन्दी साहित्य के प्रति नई प्रेरणा प्रदान की।
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